मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अहंकार होता है : तृप्ति आर्य
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक विधि से यज्ञ के साथ हुई, जिसके पश्चात सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान वैदिक विदुषी आचार्या तृप्ति आर्य ने यज्ञ संपन्न कराते हुए कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अहंकार होता है। उन्होंने कहा कि धनवान व्यक्ति को धन का, बलवान को बल का, रूपवान को रूप का और विद्वान को अपनी विद्या का अहंकार हो जाता है, लेकिन जो व्यक्ति इन सब से ऊपर उठकर विनम्रता को अपनाता है, वही समाज में सम्मान और पूज्यता प्राप्त करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रावण चारों वेदों का ज्ञाता था, लेकिन उसमें विनम्रता का अभाव था, इसलिए वह सच्चा विद्यावान नहीं कहलाया। वहीं भगवान श्रीराम ने सीमित अध्ययन के बावजूद विनम्रता के बल पर आदर्श स्थापित किया और समाज में सर्वोच्च स्थान पाया। सत्संग के दौरान आर्य संस्कारशाला के बच्चों ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस मौके पर सूरजवती देवी, विचित्रपाल सिंह, राकेश आर्य, गुड्डो देवी, दुष्यंत सिंह, कमलेश कुमारी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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