पंजीकरण न फिटनेस, बच्चे लेकर भर रहे फर्राटा।
बदांयू 8 अप्रैल।
शिक्षा सत्र तो नया शुरू हो गया, लेकिन व्यवस्थाएं अभी भी पुरानी ही चल रही हैं। निजी विद्यालयों में परिवहन सेवा के नाम पर मैजिक वाहनों की भरमार है। इन वाहनों के संचालन में नियमों को दरकिनार कर विद्यार्थियों को लाने ले जाने का काम किया जाता है।
निजी विद्यालयों में परिवहन सेवा के नाम पर ज्यादातर छोटे वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में चाहे इसको विभागीय लापरवाही कहें या फिर अभिभावकों की अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति उदासीनता, कि वह बच्चों को वाहनों में बैठाने से पहले न तो उसकी स्थिति की परवाह करते हैं और न ही सुरक्षा मानकों को ही परखते हैं।

बसों में तो काफी हद तक सुरक्षा के मानकों को पूरा कर लिया जाता है, लेकिन यदि इन छोटे वाहनों का बारीकी से निरीक्षण किया जाए तो कई खामियां उजागर हो सकती हैं।
इनमें न ही अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था होती है और न ही प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की। इनमें सीसीटीवी कैमरे व जीपीएस यंत्र भी नजर नहीं आता है।
इनमें से ज्यादातर वाहन ऐसे हैं जिनकी पंजीयन अवधि समाप्त हो चुकी है। वही फिटनेस को छोड़िए। वाहन पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार का स्लोगन तो लिखा मिल जाएगा, लेकिन ये वाहन मौका पाते ही अनियंत्रित रफ्तार में दौड़ाए जाते हैं।
एआरटीओ हरीओम ने बताया कि जब वाहनों का फिटनेस कराना होता है तो संबंधित वाहन में सभी मानक पूरे मिलते हैं। हालांकि स्कूली वाहनों में मानकों की जांच के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही सभी वाहनों को ऑनलाइन दर्ज कर उनके निर्धारित मानक भी दर्ज किए रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद यदि कोई वाहन मानक विहीन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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