ध्रुव की अटूट भक्ति का प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
बिल्सी। सोमवार को तहसील क्षेत्र के ग्राम अंबियापुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। मैनपुरी से पधारी कथावाचक साध्वी सीमा ने ध्रुव चरित्र का विस्तृत और मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति और तपस्या का वास्तविक महत्व समझाया। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। साध्वी सीमा ने ध्रुव की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को जब अपनी सौतेली माता द्वारा अपमानित किया गया, तब उन्होंने बाल्यावस्था में ही भगवान की शरण लेने का निश्चय किया। उन्होंने कठिन जंगलों में जाकर कठोर तपस्या की और अटूट श्रद्धा व दृढ़ संकल्प के बल पर भगवान विष्णु को प्रसन्न कर उनका साक्षात् दर्शन प्राप्त किया। यह प्रसंग सुनाते हुए साध्वी ने कहा कि ध्रुव की भक्ति हमें यह सिखाती है कि यदि मनुष्य सच्चे मन, अडिग विश्वास और पूर्ण समर्पण के साथ ईश्वर की उपासना करे, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां और अपमान मनुष्य को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाने का कार्य करते हैं। ध्रुव ने विपरीत परिस्थितियों को अपनी शक्ति बनाया और संसार में अमर हो गए। आज भी ध्रुव तारा के रूप में उनकी स्थिरता और अटूट विश्वास का उदाहरण हमारे सामने है। इस मौके पर सुरेश चंद्र शर्मा फौजी समेत तमाम श्रध्दालु मौजूद रहे।
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