उझानी रोड पे स्थित श्री संकटमोचन बालाजी दरवार में श्री संकटमोचन बालाजी महाराज की असीम अनुकम्पा से परम आदर्णीय गुरुजी स्व. श्री हरिश चन्द्र जी महाराज के आर्शीवाद के फलस्वरुप तथा श्री रविकान्त उपाध्याय (गुरुजी) के सानिध्य में एवं श्री दिनेश मोहन जी शास्त्री के मुखारविन्द से श्री राम कथा का दिव्य भव्य आयोजन विगत तीन दिनों से चल रहा है आज चतुर्थ दिवस में रामचरित मानस के अन्तर्गत श्री हनुमान मिलन- एवं भरत मिलाप की मार्मिक कथा का वर्णन कथा व्यास जी ने किया भगवान श्री राम की बन यात्रा में रावण द्वारा मां जगत जननी का हरण- सीता की खोज में भगवान श्री राम को श्री हनुमान जी मिलें… श्री राम और हनुमान का मिलन सीता की खोज के दौरान किष्किन्धा के पास ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ था हनुमान जी ने बाहृमण बेश में राम लक्ष्मण से मिलकर उनका परिचय जाना और फिर उन्हें अपने कन्धों पर उठाकर महाराज सुग्रीव के पास ले गये जहाँ राम – सुग्रीव मित्रता हुई और हनुमान जी भगवान श्री राम के परमभक्त बन गये …





श्री रामचरित मानस में (अयोध्या काण्ड) के अन्तर्गत चित्रकूट में भरत मिलाप सबसे भावुक प्रसंग है जही भरत और श्रीराम का मिलन होता है गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरित मानस में दोनों भाइयों के निश्चल प्रेम का वर्णन करते हुए लिखते है कि उनके मिलन से पत्थर भी पिघल गये थे भगवान श्री राम के प्रति भरत जी का निश्छल प्रेम, त्याग, निस्वार्थ प्रेम भाईचारा, आज्ञाकारी भाई त्याग की साक्षात मूर्ति थे भरत लाल जी- भगवान श्री राम भरत के इस भावपूर्ण मिलन की कथा सुनाकर व्यास जी ने सभी भक्तों को विभोर भाव कर दिया
इस अवसर पर श्रीमती प्रतिमा शर्मा, विनय रस्तोगी, बरखा रस्तोगी, अमित पाठक, अमित गुप्ता, ईश्वर चन्द्र बाष्णेय, मितांशु, बवली, नीरु, वत्सल, शुधांशु, शिखा आदि उपस्थित रहै।
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