भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन पूरी तरह भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहा है। उन्होंने कहा कि 96 बीघा निजी तालाब के 36 स्वामियों में से लगभग 30 परिवार आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं। उनका आरोप है कि पिछले लगभग दस वर्षों से फर्जी समिति के नाम पर नियमों के विरुद्ध पट्टा चलाया जा रहा है और करोड़ों रुपये का कारोबार हो रहा है, लेकिन प्रशासन पट्टा निरस्त नहीं कर सका।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालाब किनारे लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों के राजस्व अभिलेखों में भी अनियमितताएं की गई हैं। चकबंदी के अभिलेखों में किसानों के नाम दर्ज होने के बावजूद प्रशासन ने उन पर रोक लगा दी है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि 96 बीघा निजी तालाब से होने वाली मत्स्य पालन की आय आखिर किसे मिल रही है।
राजेश कुमार सक्सेना ने कहा कि यदि प्रशासन भू-माफियाओं को संरक्षण देता रहा तो भारतीय किसान यूनियन प्रदेश स्तर तक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई गरीब किसानों के अधिकारों की है और इसे आर-पार तक लड़ा जाएगा।
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