10:56 am Sunday , 19 July 2026
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सद्विचारों की क्रांति से ही संभव है विश्व में शांति – आचार्य रूप

सद्विचारों की क्रांति से ही संभव है विश्व में शांति: आचार्य रूप
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के ग्राम गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक रीति से यज्ञ के साथ हुआ, जिसमें पंडित प्रश्रय आर्य ने अथर्ववेद के छठे मंडल के दस सूक्तों के मंत्रों से आहुतियां दिलाईं। सत्संग को संबोधित करते हुए वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि समाज में स्थायी शांति की स्थापना केवल सद्विचारों की क्रांति से ही संभव है। उन्होंने कहा कि वास्तविक युद्ध बाहरी नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बैठे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों के विरुद्ध होना चाहिए। बाहरी युद्ध सदैव विनाश और पीड़ा का कारण बनते हैं, जबकि आंतरिक संघर्ष आत्मशुद्धि और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। आचार्य ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व में बढ़ते युद्ध मानवता के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत सदैव से विश्व को शांति और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाता आया है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे धैर्य, संयम और समर्पण के साथ चुनौतियों का सामना करें। इस अवसर पर राकेश आर्य, बद्री प्रसाद आर्य, विचित्र पाल सिंह, सूरजवती देवी, सरोजा देवी, कमलेश रानी, दुर्वेश कुमार सिंह सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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