उझानी रोड पे स्थित श्री संकटमोचन बाला जी दरवार में हनुमान जन्मोत्सव एवं 27 बाँ बार्षिक महोत्सव में चल रही संगीतमय राम कथा के आज तृतीय दिवस में श्री हरिः बाबा बांध धाम से पधारें कथा व्यास पं. दिनेश मोहन शास्त्री ने आज भगवान श्री राम जानकी विवाह का मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया कथा प्रसंग में बोलते हुयें कथा व्यास जी ने बताया भगवान श्री राम ववाह (सीता स्वयंवर) मिथिला में राजा जनक द्वारा आयोजित एक दिव्य प्रसंग है जहाँ श्री राम ने शिवजी के धनुष (पिनाक) को तोड़कर माता सीता से विवाह किया विश्वामित्र के साथ आये राम-लक्ष्मण दोनो भाईयो ने जनकपुर आके सीता माता के स्वयंबर में भाग लिया भगवान राम ने धनुष भंग किया- धनुष भंग के साथ साथ भगवान ने बडे बडे राजा महाराजा जो धनुष तोडने को आतुर थे पर बो सभी भगवान शंकर के धनुष को हिला तक न सके भगवान ने उन राजा महाराजाओं का अंहकार को भी भंग किया धनुष टूटते ही माता सीता ने राम जी को बरमाला पहनाई – यह भारतीय संस्कृति मे प्रेम, आदर्श और मर्यादा का प्रतीक है- यह विवाह धार्मिक दृष्टि से केवल प्रेम और सम्मान का प्रतीक नहीं था बल्कि धार्मिक कत्तव्यों और धार्मिक सामंजस्य की भी मिसाल है- भगवान श्री राम जानकी विवाह बड़ी धूम धाम से मनाया गया-
इस अवसर पर श्रीमती प्रतिमा शर्मा, ऊषा शर्मा, ओम नारायण उपाध्याय, मितांशु, प्रतीक्षा, ज्योति, पीयूष, रेनू रस्तोगी, संजीव आदि उपस्थित रहै।
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