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मूंगफली खोल रही किसानों की समृद्धि की राह, जिले में तेजी से बढ रहा रकबा

उझानी-बदांयू 21 मार्च।

जिले के किसानों का रुझान अब पारंपरिक फसलों से हटकर नकदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गेहूं, मक्का और बाजरा जैसी फसलों के स्थान पर अब मूंगफली की खेती किसानों के लिए समृद्धि की नई राह बनती जा रही है। बेहतर पैदावार और बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण पिछले कुछ वर्षों में जिले में मूंगफली का रकबा लगातार बढ़ा है।

करीब तीन ,चार दशक पहले उझानी मूंगफली की बेहतर मंडी में शुमार थी। बदांयू जिले में मूंगफली की खेती का अच्छा चलन था, जो समय के साथ कम हो गया था। अब एक बार फिर किसान इस नकदी फसल की ओर लौट रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में मूंगफली का रकबा तेजी से बढ़ा है और इस वर्ष इसके ओर अधिक होने की संभावना है। जिले में उझानी क्षेत्र के गांव नरऊ, मलिकपुर, पटपरागंज, अढौली, बसौमा में किसान मूंगफली की फसल उगा रहे हैं।

कृषि बैज्ञानिकों के अनुसार जिले में मूंगफली का रकबा बढ़ रहा है। यदि किसान उन्नत बीज और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो मूंगफली की खेती से उनकी आय और बढ़ सकती है। जिले में दोमट मिट्टी और जलवायु मूंगफली के लिए अनुकूल है, जिससे अच्छी पैदावार मिलती है। यह फसल 90 से 120 दिन में तैयार हो जाती है। सबसे खास बात है कि कम सिंचाई में भी अच्छी उपज देती है।

पहले हम बाजरा और मक्का उगाते थे, लेकिन पिछले दो साल से मूंगफली बो रहे हैं। इसमें पैदावार अच्छी मिलती है और बाजार में दाम भी ठीक मिल जाता है, जिससे मुनाफा बढ़ गया है। सुरेश पाल, किसान नरऊ।

मूंगफली की फसल ज्यादा जोखिम वाली नहीं है। अगर मौसम ठीक रहा तो उत्पादन अच्छा होता है और व्यापारी खेत से ही इस फसल को खरीद लेते हैं। इस फसल में काफी फायदा हो रहा है।
राकेश यादव, किसान मलिकपुर।

मूंगफली की खेती में लागत कम आती है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है। इसलिए अब गांव के कई किसान इसकी खेती शुरू कर रहे हैं। बाजार में भी इसकी मांग बनी रहती है। छोटे लाल कश्यप, किसान नरऊ।

मूंगफली से तेल, नमकीन और अन्य खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। इसी वजह से किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना रहती है।

सुनील कुमार, किसान नरऊ।

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