प्रकृति में हलचल उत्पन्न करेगा नवरात्रि का मां का डोली पर आगमन: आचार्य राजेश कुमार शर्मा
नवरात्रि 19 मार्च से ही
कलश स्थापना 19 मार्च को
विक्रम संवत 2083 का नाम होगा सिद्धार्थ —
शक संवत 1948 का नाम होगा पराभव—
माता की विदाई होगी हाथी पर—
इस वर्ष यह पर्व कब मनाया जाएगा, यह असमंजस बना हुआ है। ऐसे में आइए आचार्य राजेश कुमार शर्मा से जानते हैं इसकी तिथि और महत्व को—–
चैत्र नवरात्रि 2026
इस साल चैत्र नवरात्रि व नव संवत्सर 19 मार्च से शुरू होगा। वहीं नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 20 मार्च की सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। इसलिए इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को घटस्थापना के साथ होगी। इस बार माता पालकी मतलब डोली पर आ रही है, आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं देवी पुराण के अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर आना प्राकृतिक और सामाजिक नजरिए से काफी हलचल भरा माना जाता है। पालकी पर आने का मतलब है कि आने वाले समय में देश-दुनिया में थोड़ी उथल-पुथल होने की आशंका बनी रह सकती है।
नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा। इस दिन शुक्रवार होने के कारण माता का प्रस्थान हाथी पर माना गया है। धार्मिक परंपराओं में हाथी पर विदाई को बहुत शुभ संकेत माना जाता है.
हाथी समृद्धि, स्थिरता और सुख का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे अच्छी वर्षा, अनाज की भरपूर पैदावार और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिलते हैं।
कलश स्थापना शुभ समय
नवरात्रि के पहले दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है।
यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है।
इस दिन पहला शुभ मुहूर्त
प्रातः 06:52 से 08:23 तक रहेगा।
दूसरा मुहूर्त
दोपहर 11:55 से 12:46 तक रहेगा। शेष जनमानस की इच्छा।
नवरात्रि होगी पूर्ण
19 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 1- अमावस्या, प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
20 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 2- मां ब्रह्मचारिणी पूजा।
21 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 3- मां चंद्रघंटा पूजा
22 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 4- मां कुष्मांडा पूजा
23 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 5- मां स्कंदमाता पूजा
24 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 6- मां कात्यायनी पूजा
25 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 7- मां कालरात्रि पूजा
26 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 8- मां महागौरी पूजा ( इस दिन अष्टमी होगी। आप कन्या पूजन कर सकते हैं। )
27 मार्च 2026- नवरात्रि दिन 9- मां सिद्धिदात्री पूजा ( इस दिन नवमी मनाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा )
कैसे करें कलश पूजन एवं आराधना—
आचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
इसके पश्चात मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
अब एक मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी भरकर उसमें जौ बोएं।
यह जौ समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
फिर एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें और उसमें सुपारी, सिक्का तथा अक्षत डालें।
कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर स्थापित करें।
इस कलश को देवी की चौकी के समीप स्थापित करें।
इसके बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित करें, जो पूरे नौ दिनों तक निरंतर जलती रहे।
यदि अखंड ज्योति संभव न हो, तो प्रतिदिन पूजा के समय दीपक अवश्य जलाएं।
पूजन के समय ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा
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