10:24 am Sunday , 19 July 2026
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होली शब्द का तो उच्चारण है हो +ली- ब्रह्माकुमारी करुणा दीदी

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बदायूं स्थित सेवा केंद्र की प्रभारी एवं वरिष्ठ राजयोग शिक्षका ब्रह्माकुमारी करुणा दीदी ने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए होली का आध्यात्मिक रहस्य समझाया lउन्होंने कहा कि होली शब्द का तो उच्चारण है हो +ली अर्थात जो बात होली उसका चिंतन न किया जाए lसबसे बड़ी बात यह है कि होली का रंग के साथ क्या संबंध है? वास्तव में तो ज्ञान का रंग अथवा सत्संग का रंग ऐसा रंग है जिससे मनुष्य बीती को विसार कर आगे के लिए अपने कर्मों को सुधार सकता है और बीती हुई बात को मन से निकाल कर अपने संबंधी एवं परिचित व्यक्तियो से प्रेम का नाता बन सकता हैl उन्होंने कहा कि प्रकृति के वृक्ष भी अपने पुराने पत्तों को त्यागते हैं तभी उनमें नई-नई पत्तियां और फूलों का सृजन होता हैl इसी प्रकार मनुष्य को चाहिए कि अपने मन से बीती हुई बातों को बीती सो बीती कर होली मे उनकी आहुति लगा दे तो उसके जीवन में नई आशाओं ,नए संबंधों का सृजन होगा और जीवन में भरपूरता हो जाएगीl होली को हमें इसी रूप में मनाना चाहिए l इस अवसर पर बीके किरण दीदी, बीके ललिता ,बीके सुरभि बहन ,बी के प्रीति, बीके रामस्वरूप सपरा, बी के मुन्नालाल शाक्य ,बीके दीनदयाल ,बीके मनोज भाई ,बीके संजय भाई तमाम भाई-बहन उपस्थित रहेl

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