payal
मिट्टी की खुशबू में बसा है सुकून का असली घर
इस गाँव की राहों में छुपा है बचपन का हर सफ़र
तालाब की लहरों में जैसे यादें मुस्कुराती हैं
गायों की घंटियों में सादगी गीत सुनाती है
ना शोर ना दिखावा बस अपनापन हर ओर
यही तो है वो जन्नत जहाँ दिल हो जाता है चोर
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