बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बात अग्रेजों के जमाने की है जब बदायूं क्लब से लेकर वर्तमान में बदायूं के ऐलन क्लब वर्तमान के बदायूं क्लब रोडवेज से एसके कालिज को जाने वाले मार्ग पर खाली पडे विशालकाय मैदान पर महारानी विक्टोरिया के नाम पर विक्टोरिया पार्क की स्थापना की गई जिसको बाद में कम्पनी बाग का नाम दिया गया और इसी मैदान के एक भाग में पहले गांधी नेत्र शती चिकित्सालय और बाद में शेष बचे मैदान पर प्राइवेट बस अडडे की स्थापना की गई। बात यह नहीं है कि नेत्र चिकित्सालय और बस अडडे की स्थापना क्यों की गई सवाल तो यह है कि सरकारी भूमि पर बनाये गए इन गैर सरकारी और अर्ध सरकारी संस्थानों को दुकानों का निर्माण कराने की स्वीकृति देने और उनसे किराया वसूलने का अधिकार कैसे दिया गया। आज हालत यह है कि कम्पनी बाग अथवा विक्टोरिया पार्क वाली सरकारी भूमि पर दुकानें बनाकर प्रतिमाह किराया वसूलने वाले किरायें का कोई अंश भूमि की स्वामी प्रदेश के सरकारी खजाने में जमा नहीं करते ओर जब मर्जी आए एक से दूसरे के नाम दुकानें करते रहते रहते हैं या फिर अंजान होने का नाटक करके अपनी तिजोरियां गर्म करते हैं।
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