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कासगंज 9 फरवरी।
रेलवे मुसाफिरों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे तो करता है लेकिन ऐसा धरातल पर नज़र नहीं आता। बीती रात 9 बजे कासगंज स्टेशन पर बिजली जाने के बाद छाया अंधेरा 9.30 तक जारी रहा। वही कासगंज से बरेली जाने वाली 10.05 पर ट्रेन संख्या 55329 भी एक नंबर प्लेटफार्म पर अंधी ही खडी नजर आई, सवारियों ने मोबाइल की बेटरी से काम चलाया। वही रेलवे स्टेशन पर लोग चाय के लिए भी तरसते नजर आऐ।
बताते चलें किसी समय कासगंज की पूड़ी सब्जी को शायद ही कोई यात्री बिना खाऐ सफर करता हो मगर अब रेलवे ने स्टेशन पर गैस सिलेंडर से आग जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पकोडी, समोसे, ब्रैड पकोड़ा अब ठंडा ही बिकने लगा है। चाय भी ज़्यादातर ठंडी ही मिलती है। क्योंकि स्टेशन पर सिर्फ इंडेकशन पर ही काम किया जा सकता है। इंडेक्शन के प्रयोग के चलते ही ज्यादातर सवारियों को अब गर्म पकोडी व पूड़ी खाने को नहीं मिल पाती।
बीती रात 9 बजे मथुरा से आने वाली सवारियों को प्लेटफार्म बदलने में अंधेरे में ही मोबाइल की बेटरी जलाकर धक्के खाने पड़े। वही बिजली ना होने पर लोगों को चाय के लिए भी तरसना पड़ा क्योंकि इंडेक्शन बिना बिजली चल नहीं सकता गैस का प्रयोग करना प्रतिबंधित है। फिर रेलवे विभाग की मुसाफिरों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे खोखले नजर आते हैं।
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