7:38 am Sunday , 19 July 2026
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निर्धनता अभिशाप है किंतु पाप से धन न कमाएँ : आचार्य संजीव रुप

बिल्सी, तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया ! अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ कराया ! अथर्ववेद के मंत्रों की व्याख्या करते हुए कहा “निर्धनता अभिशाप है । निर्धनता का मूल कारण आलस्य व अकर्मण्यता है ! मनुष्य को इंद्र की भांति पुरुषार्थ करके कठोर परिश्रम करके धन कमाना चाहिए क्योंकि निर्धनता भक्ति के द्वार भी बंद कर देती है ! भूखे भजन नहीं होता ! परोपकार भी तभी हो सकता है जब व्यक्ति के पास धन हो किंतु, धन हमेशा पुरुषार्थ से आए , पाप के रास्ते से धन ना आए । उन्होंने कहा कि भगवान कहते हैं अगर आपके पास धन आए तो उसको खर्च भी करिए अच्छे कामों में ! दुखी जरुरतमंद लोगों की सहायता करिए ! शिक्षा सदाचार तथा राष्ट्रहित के कार्यों में मनुष्य को धन खर्च करना चाहिए । इस तरह आप महान बनेंगे ।इस अवसर पर प्रश्रय आर्य,महेंद्र आर्य , कमलेश रानी, श्रीमती रेखा रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती सरोज देवी, कुमारी तानिया , कौशिकी रानी , पंजाब सिंह, बद्री प्रसाद आर्य ,राकेश आर्य आदि मौजूद रहे !

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