सरकारी राशन में वर्षों से घटतौली का खुला खेल! पूर्व कोटेदार की ऑडियो में रिश्वत और घटतौली की स्वीकारोक्ति
*_ हर कार्ड पर 5–6 किलो कम राशन देने की बात सामने आई, सप्लाई विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में*
बिल्सी बदायूं 13 जनवरी ।
जनपद के विकास खंड अंबियापुर अंतर्गत ग्राम सतेती में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्राम के पूर्व सरकारी राशन डीलर पर आरोप है कि उसने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान गरीब लाभार्थियों को जानबूझकर कम तौलकर राशन दिया और इसकी भरपाई विभागीय अधिकारियों को दी जाने वाली कथित रिश्वत से की।
इस संबंध में ग्राम सतेती निवासी अजीत सिंह द्वारा जिलाधिकारी बदायूं को लिखित शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि प्रकरण से जुड़े ऑडियो साक्ष्यों में निवर्तमान राशन डीलर उमेश शर्मा एवं उनके पुत्र नवनीत शर्मा को यह स्वीकार करते हुए सुना जा सकता है कि प्रत्येक राशन कार्ड पर औसतन 5 से 6 किलोग्राम तक कम राशन दिया जाता रहा। इस बातचीत में सप्लाई इंस्पेक्टर को नियमित रूप से रिश्वत दिए जाने की बात भी सामने आती है, जिससे विभागीय मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।
शिकायत में कहा गया है कि है कि प्रधान और कोटेदार के प्रभाव के कारण लंबे समय तक भय और दबाव के चलते कोई भी खुलकर शिकायत नहीं कर सका। उल्लेखनीय है कि पूर्व कोटेदार की पत्नी वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रभाव और दबदबे का वातावरण बना रहा। इसी कारण यह कथित भ्रष्टाचार वर्षों तक दबा रहा।
*––सरकारी राशन के गबन का मामला*
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत वितरित किया जाने वाला राशन पूरी तरह सरकारी संपत्ति होता है। निर्धारित मात्रा से कम राशन देना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी राशन के गबन और आपराधिक विश्वासघात की श्रेणी में आता है। यदि ऑडियो में की गई स्वीकारोक्ति की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी राशन के गबन के आधार पर गंभीर आपराधिक मामला बनता है।
*––केवल लाइसेंस निरस्तीकरण पर उठे सवाल*
हालांकि बाद में संबंधित कोटेदार का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया, लेकिन इस कार्रवाई को कई लोग अपर्याप्त मान रहे हैं। न तो अब तक कोई एफआईआर दर्ज हुई है, न ही कथित गबन किए गए राशन की रिकवरी की गई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल लाइसेंस रद्द कर देने से इतने बड़े भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल दिया गया?
*––फर्जी शपथपत्र का आरोप भी चर्चा में*
प्रकरण में एक और गंभीर आरोप यह है कि कोटेदार द्वारा प्रशासन को गुमराह करने के उद्देश्य से एक शपथपत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें ग्राम प्रधान से संबंध विच्छेद होने की बात कही गई। बताया जा रहा है कि इस दावे के समर्थन में कोई वैधानिक या न्यायालयीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे शपथपत्र की सत्यता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
*– प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग*
शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी सहित उच्च अधिकारियों को प्रकरण से अवगत कराते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। मांग की जा रही है कि दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई, विभागीय दंड और सरकारी क्षति की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।
*–– जनहित और सिस्टम पर सवाल*
यह मामला केवल एक गांव या एक कोटेदार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह पूरे सार्वजनिक वितरण तंत्र की निगरानी और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे आम जनता का शासन और प्रशासन पर भरोसा और कमजोर हो सकता है।
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