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उझानी में जैन समाज का चार दिवसीय महोत्सव।
उझानी बदांयू 3 नवंबर।
नगर के मोहल्ला साहूकारा स्थित जैन मंदिर में नव निर्मित चौबीसी के 24 जिनेन्द्र भगवानों समेत नवनिर्मित मान स्तम्भ में जैन जिनविम्व की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के आयोजन के दूसरे दिन आज जैन आचार्य श्री 108 वशु नंदी सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में
अस्थाई बेदी में विराजमान भगवानो के आत्म-कल्याण और परमात्मा बनने की प्रक्रिया को शुरू किया गया।
वसुनंदी जी महाराज ने कहा कि यह पांच प्रमुख घटनाओं (गर्भ, जन्म, दीक्षा, ज्ञान और मोक्ष) के माध्यम से दर्शाया जाता है। यह महोत्सव भक्तों को तीर्थंकरों के जीवन से प्रेरणा देता है, उनके गुणों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है और पुण्य-बन्धन का कारण बनता है। जैन धर्मानुसार पाषाण से भगवान बनने तक की प्रक्रिया पंचकल्याणक कहलाती है।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि
आत्म-कल्याण और प्रेरणा- यह महोत्सव आत्मा को परमात्मा बनने की यात्रा का उत्सव है, जो जीवन के सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर आनंद की ओर बढ़ने के लिए प्रेरणा देता है।
महाराज जी ने कहा कि धार्मिक संस्कारों का संचार- यह जन-जन तक धर्म और संस्कारों को पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिससे लोग धर्मात्माओं और शलाका पुरुषों के जीवन से प्रेरित होते हैं।
पुण्य-बन्धन का कारण- शास्त्रों के अनुसार, तीर्थंकरों के पंचकल्याणकों में शामिल होना सातिशय पुण्य के बन्धन का कारण बनता है।


ऐसा मानना है कि सकारात्मक बदलाव- पंचकल्याणक महोत्सव में शामिल होने वाले लोगों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव और परिवर्तन आता है।
आध्यात्मिक अनुभव उन लोगों के लिए एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है जो इसे एक साधारण कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के एक श्रेष्ठ अनुष्ठान के रूप में देखते हैं।
यह लोगों को अज्ञान से ज्ञान की ओर लेकर जाता है ,यह उत्सव हमें सिखाता है कि कैसे एक आत्मा को परमात्मा बनने के लिए संसार से विरक्ति, तप और केवल ज्ञान प्राप्त करने जैसे कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है।
पंचकल्याणक की पांच घटनाएं
गर्भ कल्याणक- जब तीर्थंकर की आत्मा माता के गर्भ में आती है।
जन्म कल्याणक- जब तीर्थंकर का जन्म होता है।
दीक्षा कल्याणक- जब तीर्थंकर सब कुछ त्यागकर मुनि दीक्षा ग्रहण करते हैं।
ज्ञान कल्याणक- जब तीर्थंकर को केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त होता है।
मोक्ष कल्याणक- जब तीर्थंकर शरीर का त्याग कर निर्वाण प्राप्त करते हैं।
इस मौके पर समाज के अध्यक्ष अनूप कुमार जैन,मृगांक कुमार जैन , अर्जित जैन,निखिल जैन, जयदीप जैन,आकाश जैन,साजन जैन,सोनल जैन,प्रियांक जैन,प्रशांत जैन,अनीता जैन,ममता जैन,तृप्ति जैन, सुरेश चंद्र जैन,संगीता जैन, विनीत कुमार जैन,अनामिका जैन,सम्यक जैन, आदि मौजूद रहे।
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