जिला संवाददाता सौम्य सोनी की रिपोर्ट—
बदायूं में गंगा तट पर आस्था का संगम, रौनक बढ़ी*****
बदायूं में रुहेलखंड का प्रसिद्ध ककोड़ा मेला पूरे उल्लास के साथ जारी है। गंगा तट पर लाखों श्रद्धालु पहुंच चुके हैं और उन्होंने अपने टेंट लगाकर प्रवास शुरू कर दिया है। सुबह से ही गंगास्नान का क्रम जारी है, जिसके बाद श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ, मां गंगा और अपने आराध्य देवों की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
मेले में धार्मिक अनुष्ठान चरम पर हैं। कई परिवार अपने बच्चों के मुंडन संस्कार करवा रहे हैं, जिसमें पुजारी विधि-विधान से मुंडन और हवन संपन्न करा रहे हैं। गंगा तट पर घंटा-घड़ियाल की ध्वनि और ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
बच्चों और युवाओं के लिए मेले में विभिन्न प्रकार के झूले उपलब्ध हैं। बड़े झूले, मौत का कुआं और अन्य झूला स्टॉल पर दिनभर भीड़ देखी जा रही है। खाने-पीने के शौकीनों के लिए रेस्टोरेंट, मिठाई और फास्टफूड के ठेले भी सजे हुए हैं। मीना बाजार, लकड़ी बाजार, बर्तन और बक्सा बाजार में भी खूब रौनक है, जहां दूर-दूर से आए दुकानदार व्यापार कर रहे हैं।
महिलाएं धार्मिक सामग्री, खिलौने और श्रृंगार के सामान की खरीदारी में व्यस्त हैं। शाम होते ही मेले की रौनक और बढ़ जाती है। चारों ओर झालरों की रोशनी और दुकानों की जगमगाहट से पूरा क्षेत्र रोशन हो उठता है। गंगा किनारे होने वाली आरती का आयोजन भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।
प्रशासन और पुलिस ने मेले में सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। एक कंट्रोल रूम के साथ-साथ अस्थाई चौकियां और चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। सीओ और एसडीएम सहित प्रशासनिक अधिकारी लगातार मेले का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
ककोड़ा मेला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का भी प्रतीक बन गया है। यहां हर उम्र के लोग अपनी रुचि के अनुसार आनंद ले रहे हैं, जिसमें धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर लोकगीतों की गूंज शामिल है। यह पूरा क्षेत्र मिनी कुंभ के रूप में श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का संगम बन चुका है।






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