प्रभात फेरी का सबसे मनोहर दृश्य वह था जब एक नन्ही बालिका अपने कोमल हाथों में सनातन संस्कृति का ध्वज थामे अग्रभाग में चल रही थी।
यह दृश्य न केवल भक्तों के लिए आनंद का क्षण था, बल्कि सनातन परंपरा की निरंतरता और नई पीढ़ी में जागृत भक्ति भावना का प्रेरक प्रतीक बन गया।
हर भक्त की निगाहें उस छोटी बालिका पर ठहर गईं —
जो दृढ़ निश्चय और श्रद्धा के साथ प्रभात फेरी का नेतृत्व कर रही है।
उसके हाथों में लहराता हुआ ध्वज जैसे संदेश दे रहा हो —
“भक्ति, अनुशासन और संस्कृति की यह ज्योति आने वाली पीढ़ियाँ भी जलाती रहेंगी। ”
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