नगर कुंवर गांव। जहाँ एक ओर महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं वहीं दूसरी ओर बाज़ार में भक्ति के नाम पर मुनाफ़े की बरसात
करवा चौथ की रात कुंवरगांव “भक्ति नहीं, बिज़नेस” का मैदान बना
मिठाई की दुकानों पर ऐसी भीड़ मानो व्रत नहीं, कमाई का पर्व मनाया जा रहा हो।
जलेबी और इमरती की महक में अब श्रद्धा नहीं, नोटों की गंध घुली हुई हो
— “भक्ति अपनी जगह, पर धंधा इस बार आसमान छू रहा रातों-रात लाखों की बिक्री हो रही
लोग पूछ रहे हैं — क्या त्योहार अब भावना से ज़्यादा बाज़ार का सौदा बन चुके हैं?
कभी जो व्रत सादगी और प्रेम का प्रतीक था, आज वही लाइट, सजावट और सेल ऑफर में खोता जा रहा है।
कई दुकानों पर बिना ढकाव के मिठाई खुले में बिकती रही — मक्खियाँ भिनभिनाती रहीं, और दुकानदार “मांग ज्यादा है, सफाई बाद में” कहकर पल्ला झाड़ते दिखे।
करवा चौथ की रात ने फिर साबित किया कि इस दौर में आस्था से ज़्यादा असरदार मुनाफ़ा है।
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