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*में इंसा हूं, इंसान ही रहने दो -नही बनना मुझे इस दौर का भगवान्… रहने दो

संस्कार भारती का रामलीला स्टेज़ पर बिशाल कवि सम्मेलन।

उझानी बदांयू 7 अक्टूबर।

रामलीला महोत्सव में बीती रात संस्कार भारती की ओर से स्टेज़ पर काव्य संस्कृति का अदभुत संगम देखने को मिला। आऐ कवियों ने एक से एक सुंदर कविताएं सुनाकर जहां देशभक्ति का जज्बा भरा। वही हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने श्रोताओं को लोटपोट कर दिया।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन व बंदना से शुरू हुआ।

कवियत्री जूली प्रभा ने सुनाया –

मस्तक पर शोभा चंदन की रखती हू, नैनों में नूतन अभिनंदन रखती हूं।

प्रीति विश्वास ने फ़रमाया –
हमारा मान हिंदी है हमारी शान हिंदी है, जहां में अपने भारत की पहचान हिंदी है।

मोदीनगर के बलवीर सिंह खिचड़ी ने अपनी कविता कुछ यूं सुनाई –

पीने वाला जल ही था,नगर निगम का नल ही था। निकल के सांप गिरा टब में .. पुण्य कर्म का फल ही था।

हाथरस मुरसान से आऐ हास्य के जाने-माने कवि सबरस ने सुनाया –

ऊंचा है हिंद गगन से जोशीला पवन अगन से.. मत उलझो मेरे वतन से नहीं तो मर जाओगे कसम से।

रामचरण साथी ने कहा –

पुल ओर सड़कें तो सेकंडों बना ली, पर आदमी को आदमी से जोड़ नहीं पाएं हम।

कवियत्री विजय लक्ष्मी पंडित ने सुनाया –

जो करें पीठ पे उस वार की ऐसी तैसी,जिद पे आ जाऊं तो दो-चार की ऐसी तैसी।

रोहित राकेश ने सुनाया –

मां भारती की हम उतारें आरती,जय संस्कार भारती जय संस्कार भारती।

विनोद सक्सेना बिन्नी ने कुछ इस तरह कहा –
में इंसा था मैं इंसा हूं मुझे इंसान ही रहने दो, नहीं बनना मुझे इस दौर का भगवान् रहने दो।

इससे पहले संस्कार भारती के डाॅ गीतम सिंह,डाॅ प्रभाकर मिश्रा, संजीव सक्सेना अमर, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण कुमार बौबी,राम मोहन शर्मा, दर्शन धवन, प्रवेश शर्मा, अभिषेक जैन, आदि ने मंच पर आऐ कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस मौके पर रीता शर्मा, रूचि गुप्ता, सोनिया अग्रवाल,नीतू गर्ग,विभा गोयल,रिंकी साहू,मीनू वार्ष्णेय, प्रीति गर्ग,सीमा,अलका , गोपाल शर्मा, अरविंद शाक्य, राजपाल शाक्य,अनमोल गुप्ता आदि मौजूद रहे।
राजेश वार्ष्णेय एमके

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