10:27 am Sunday , 19 July 2026
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राम के वन जाते ही अधीर होकर भूमि पर गिरे दशरथ

बिल्सी
नगर के गौशाला रामलीला कमेटी की ओर से हो रहे रामलीला में बुधवार की रात्रि राम वन गमन लीला का मंचन किया गया।मंचन का शुभारंभ पार्थ हॉस्पिटल चंदौसी के संचालक डॉ वीरेश कुमार ने भगवान राम की आरती उतारी। तत्पश्चात डॉक्टर वीरेश कुमार को रामलीला कमेटी के पदाधिकारी लव कुमार एवं अजीत गुर्जर द्वारा सम्मानित किया गया। मंचन में कैकेयी के ओज पूर्ण अभिनय और दशरथ का भाव पूर्ण अभिनय देख दर्शकों की आंखें नम हो गई। देवासुर संग्राम में दिए गए वरदान को कैकेयी ने मंथरा के बहकावे में आकर पहला वरदान भरत को राज्य और राम के लिए वनवासी रूप में चौदह वर्षों का वनवास मांगा तो दशरथ बदहवास होकर धरा पर गिर गए। राम को जब पता चला कि पिताजी मां कैकेयी के भवन में है और उन्हें याद कर रहे हैं तो वह पहुंचे और पिता को जमीन पर विह्वल हाल में पड़े देखा तो राम ने माता कैकेयी से पिता जी की मूर्छा का कारण पूछा तो कैकेयी ने सारा वृतांत सुना दिया और कहा कि तुम जल्द से आओ और मैं तुम्हे वलकल वस्त्र देती और उसे पहन कर वन की ओर निकल जाओ।
जैसे ही यह बात माता कौशल्या को पता चली तो उन्होंने कहा कि पुत्र यदि केवल पिता की ही आज्ञा है तो तुम वन को मत जाओ यदि माता कैकेयी ने भी आदेश दिया हो तो चले जाओ। सीता और लक्ष्मण भी वन को जाने की जिद में अड़े तो उन दोनों को लेकर श्रीराम वन की ओर निकल पड़े। उक्त अभिनय को देख दर्शकों की आंखें भर आई।

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