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धांधली- मिड डे मील में हाइजीन बजट हजम, रसोइयां बिना सुरक्षा किट के बनाती हैं खाना

बदांयू 16 सितंबर।

हर विद्यालय को हर साल कैप, ग्लब्स और एप्रन के लिए 700 रुपये मिलते हैं। जिले के सभी स्कूलों को लाखों रुपये हर साल मिलते है मगर किसी को अता-पता नहीं है।

परिषदीय स्कूलों के बच्चों को साफ सुथरा मिड डे मील देने के लिए सरकार रसोइयों के लिए सुरक्षा किट मुहैया कराने का बजट हर साल देती है। रसोइयों को एप्रन, कैप और ग्लब्स देने के लिए सालाना 700 रुपये दिए जाते हैं पर अधिकतर स्कूलों में बिना किट पहने रसोइयां खाना बनाती हैं। 700 रुपये के हिसाब से जिले के स्कूलों पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं फिर भी बच्चों की थाली असुरक्षित क्यों है।

सरकार हर साल परिषदीय स्कूलों में बच्चों को साफ-सुथरा और पौष्टिक मिड डे मील देने के लिए लाखों रुपये खर्च करती है। इसी क्रम में कोविड से पहले से ही रसोइयों को एप्रन, कैप और ग्लब्स देने का आदेश जारी किया गया था। स्कूलों की लाइव पड़ताल में सामने आया कि कई शिक्षकों को यह तक नहीं पता कि आखिरी बार पैसे कब आए थे। स्कूलों में मिड डे मील योजना चल रही है। इनमें परिषदीय विद्यालयों में महिला रसोइये खाना बनाती हैं। कुछ स्कूलों में पंचायती राज विभाग की ओर से मिड डे मील बनाने की सामग्री दी जाती है। कई स्कूलों में सामग्री एनजीओ और दर्जनों स्कूलों में सामग्री प्रबंधन समिति पहुंचाती है।

मिड डे मील के जिला समन्वय ने बताया कि हर स्कूल को 700 रुपये हर साल दिए जाते हैं। सभी रसोइयों को एप्रन, कैप और ग्लब्स पहनना जरूरी है।

कंपोजिट विद्यालय में रसोइया गीता बिना कैप, ग्लब्स और एप्रन के ही खाना बनाती हैं। उनका कहना था कि उन्हें ये सामान दो साल पहले आखिरी बार मिला था।

एक अध्यापिका ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 2022 में 700 रुपये आए थे। फिर कोई धनराशि नहीं आई।

प्रदीप प्रजापति

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