बदांयू 7 सितंबर।
जिले में बिना रोक-टोक के अप्रशिक्षित लोगों के हाथों अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनकी मनमानी और गलत रिपोर्टिंग के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। हर तीन महीने पर अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच की जाती है, जो महज खानापूर्ति रहती है। शिकायत के बाद ही अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर आखिर क्यों कार्रवाई की जाती है, यह एक बड़ा सवाल है।
जिले में कुल कितने अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होते हैं। इसकी भी सही जानकारी विभाग के पास नहीं है, पिछले दिनों जिलाधिकारी की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है। सांठ-गांठ से चल रहे सेंटरों पर सरकारी ताले लटकने लगे हैं। यह जांच अभियान शुरू हो गया है, शिकायत मिलने पर त्वरित जांच कराई जा रही है। जांच के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इसलिए निष्पक्षता के साथ जांच की जाती है।
हाल फिलहाल जिले के तीन अल्ट्रासाउंड सेंटर सील हुए है। एक का लाइसेंस निरस्त किया गया। लाइसेंस जारी होने से पहले सेंटर के हर पहलुओं को स्वास्थ्य विभाग की टीम अवलोकन करती है। कुछ दिनों तक सेंटर के संचालित होने के बाद खामियां मिल जाती हैं। सेंटर को सील कर दिया जाता है। जिले में ज्यादातर अल्ट्रासाउंड सेंटरों की कमान अप्रशिक्षितों के हाथ में है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के ही किसी ओर की मुहर पर रिपोर्ट बना कर दे दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग है कि उसकी नींद टूटती ही नहीं।






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