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बुलंदशहर हादसे से सबक नहीं, ट्रैक्टर-ट्रॉली में ढो रहे सवारी जिम्मेदारों के दावे फेल

बदांयू 27 अगस्त।

कासगंज के बाद अब बुलंदशहर में बड़ा हादसा हुआ है। जिसमें ट्रैक्टर-ट्रॉली से हुए हादसे में 11 लोगों ने जान गंवा दी। जबकि 27 लोग घायल हुए हे। फिर भी परिवहन विभाग के जिम्मेदार अफसरों की नींद नहीं टूट पाई है। जिले में धड़ल्ले से ट्रैक्टर-ट्रॉली और मालवाहक वाहनों में सवारियां ढोई जा रही हैं। अफसर महज ओवरलोड और ओवर स्पीड़ वाले वाहनों की ही निगरानी करते हैं।

ज्ञात रहे कानपुर में 2 अक्तूबर 2022 को यात्रियों को लेकर जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से भीषण हादसा हुआ था। जिसमें 27 लोगों की जान गई थी। इस हादसे की गूंज से सरकार भी हिल गई और तुरंत ट्रैक्टर-ट्रॉली में यात्रा को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया गया। प्रदेश के सभी आरटीओ को इन पर लगाम लगाने के निर्देश दिए गये। मगर वह सिर्फ कागजी साबित हुऐ।

अब बुलंदशहर के खुर्जा हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार 11 लोगों ने हादसे में जान गवां दी। हादसों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी सतर्कता नहीं बरत रहे। शहर के अलावा देहात में ट्रैक्टर-ट्रॉली के अलावा अन्य मालवाहक वाहनों में सवारियों को ढोया जा रहा है। अब हाल ये है कि जिले के हर मार्ग पर माल वाहक वाहनों में यात्रियों को ढोया जा रहा है। देहात क्षेत्रों में हाल इससे भी ज्यादा बुरा है।

शहर के बरेली मथुरा हाइवे सहित उझानी कादरचौक मार्ग हो या उझानी बिल्सी, या दिल्ली हाइवे पर कहीं ट्रैक्टर-ट्रॉली तो अन्य मालवाहक वाहनों में लोगों को सफर करते देखा गया।

ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग कृषि कार्य अथवा सामान ढोने के लिए किया जाता है। लोगों ने इसका प्रयोग यात्रियों को ढोने में शुरू कर दिया। व्यवसायिक कार्य के लिए महज पुलिस या एआरटीओ की ढील से इन लोगों के हौसले बुलंद हैं।

जिले में किसी भी हालत में ट्रैक्टर-ट्रॉली और मालवाहक वाहनों में सवारियां ढोने नहीं दी जाएंगी। जल्द इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। निगरानी कर ट्रैक्टर से सवारियां लाने और ले जाने पर रोक लगवाई जाएगी। अंबरीष कुमार एआरटीओ।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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