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उझानी बदांयू 26 अगस्त।
नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित गोवंश का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ये बेसहारा पशु जहां किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। वहीं सड़क हादसों का कारण भी बनते जा रहे हैं। बीते सप्ताह गोवंशों के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। जबकि पिछले दिनों जिले में कई किसानों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है।
किसान महावीर सिंह, देवेन्द्र सिंह, सचिन ठाकुर, महीपाल सिंह, सत्यवीर सिंह आदि का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते नगर की सड़कों और खेतों में दिन-रात गोवंश घूम रहे हैं। किसान अपनी फसलें बचाने के लिए रातभर जागकर रखवाली करने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें डर है कि थोड़ी सी चूक से पूरी फसल तबाह हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार शिकायत की लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन भले ही गोवंश को गोशालाओं में भेजने का दावा करता हो लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। नगर की प्रमुख सड़कों से लेकर देहात के हर रास्ते पर गोवंशों का जमावड़ा देखा जा सकता है।
निराश्रित गोवंशों को पकड़ने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को दी गई है। समय-समय पर जिलाधिकारी व सीडीओ स्तर से निर्देश भी जारी किए जाते हैं। लेकिन लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाती,उसी का परिणाम है कि आवारा गोवंशीय पशुओं के झुंड गली मोहल्लों सहित हाइवे व खेतों में नजर आते हैं।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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