बावट और हरीनगला में गंदगी के ढेर, लेकिन प्रधान बोले – “हमारा गांव सबसे सुंदर”
कुंवरगांव। सालारपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में सफाई के नाम पर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट हो रही है। लाखों रुपए खर्च दिखाकर प्रधान और सचिव अपनी जेबें भर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि नालियां बजबजा रही हैं, कीचड़ से रास्ते पटे पड़े हैं और ग्रामीण गंदे पानी से होकर निकलने को मजबूर हैं।
बावट गांव में ही 8 अगस्त को दो खातों में करीब 17 हज़ार रुपए सफाई के नाम पर निकाल दिए गए। सवाल ये है कि क्या ये भुगतान असली सफाई कर्मचारियों को हुआ या फिर सिर्फ कागजों पर खेल हो गया? गांव में सफाई की हालत देखकर साफ है कि रकम जेबों में गई, नालियों में नहीं।
गांव के मजरा हरीनगला में हालात और भी बदतर हैं। यहां तो रास्ते पर चलना तक मुश्किल है, गंदगी और कीचड़ का साम्राज्य है। मच्छरों के झुंड से बीमारी फैलने का डर ग्रामीणों को हर पल सता रहा है।
लेकिन हैरानी की बात ये कि ग्राम प्रधान भीमसेन का दावा है – “हमारे गांव से सुंदर कोई गांव नहीं है, गाड़ी का एक पहिया भी पानी में नहीं भीगेगा, सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद है।”
गांववाले प्रधान के इन दावों को झूठा बताते हुए डीएम से शिकायत कर चुके हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सफाई पर निकाले गए पैसों की जांच हो और दोषियों पर सख्त कर्रवाई की जाए।
रिपोर्टर अनुज रस्तोगी कुंवर गांव

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