बदांयू 2 अगस्त।
रक्षा बंधन पर्व के लिए बाजार में महिलाओं व लड़कियों के लिए राखियों की भरमार है। इसमें डायमंड राखी (स्टोन राखी), रंग-बिरंगी रेशम, फैंसी डोरी, भैया-भाभी सेट, लुम्बा (लेडिज कड़े), गणेश, कृष्णा, श्रीमद्भागवत राखी, युवतियों को भाई सुपर स्टार, ब्रो-राखी, स्वैग ब्रदर व फुकरे ब्वॉयज, कार्टून राखी सभी को लुभा रही हैं।
फिलहाल छोटा भीम, टेडी बियर, डोरीमोन व कार्टून क्रेकर जैसी राखियों की डिमांड कम है। बाजार में महिलाओं के लिए सजी थालियां भी मंगवाई गई है। बाजार में 20 से 650 रुपये तक की राखियां बाजार में उपलब्ध हैं। फैंसी डोरी 10 से 20 व डायमंड राखी की कीमत 40 से 350 रुपये प्रति पीस है।
रक्षाबंधन पर्व को लेकर बाजारों में उत्साह देखने को मिल रहा है। यह पर्व 9 अगस्त को मनाया जाएगा। पर्व की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे ही बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है। महिलाएं आठ दिन पहले ही खरीदारी में जुट गई हैं। बाजार में दुकानों के अलावा राखियों के स्टॉल सजने लगे हैं। बाजारों में विभिन्न डिजाइनों की राखियों की भरमार है। जगह-जगह लगे राखी के स्टॉल पर राखी खरीदतीं लड़कियां, महिलाएं व युवतियां उत्साहित नजर आ रही हैं।
राखी विक्रेता राजेश कुमार, श्री राम, देवेन्द्र ने बताया कि बाजार में रक्षाबंधन पर्व को लेकर खरीद बढ़ने लगी है। खरीदारी के लिए महिलाओं व युवतियों की भीड़ पहुंचने लगी है।
दिल्ली से मंगवाई सजी हुई रेडिमेड थालियां
राखी विक्रेता गणेश ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर महिलाओं को घरों मेेें थाली सजाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। इसके लिए दुकानों पर सजी सजाई रेडिमेड थालियां खासकर दिल्ली से मंगवाई गई हैं। थाली को खासकर लाल कपड़े व घोटे से सजाकर रोली, चंदन, चावल, चंदन, मिश्री, कलावा उपलब्ध है।
यह थालियां वैरायटी के हिसाब से 80 से 250 रुपये तक उपलब्ध हैं।
सूट-साड़ियों की बढ़ने लगी डिमांड
रक्षाबंधन पर्व को लेकर बाजार में सूट व साड़ियों की डिमांड भी बढ़ने लगी है। दुकानदार रोहित, सुनील, प्रवीण ने बताया कि सूट-साड़ियों में कैमरिक कॉटन, जाम कॉटन, खादी व जोरजट से निर्मित वैरायटी महिलाओं की खास पसंद बनी हुई है। दुकानों पर 350 से 8500 रुपये तक के सूट उपलब्ध है। वहीं साड़ियों की मांग फिलहाल कम है। दुकानों पर आने वाली 10 महिलाओं में से केवल तीन महिलाएं ही साड़ियां खरीद रही हैं। कई महिलाएं रक्षाबंधन पर बेटियों को सूट देने के लिए खरीददारी कर रही है।
प्रदीप प्रजापति।


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