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पत्रकारिता क्षेत्र का आज हुआ विस्तार – प्रोफे.(डॉ.)कमला माहेश्वरी ‘कमल’

प्रोफे.(डॉ.)कमला माहेश्वरी ‘कमल’

पत्रकार दिवस पर लिखित 30.5.2025 ●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
पत्रकारिता :  सजग दृष्टि
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पत्रकारिता क्षेत्र का, आज हुआ विस्तार ।
शेष न कोई क्षेत्र हैं , जहांँ नहीं अवतार ।।

कहीं हार्ड कॉपी छपे , कहीं छपे ई-पत्र।
सब गरिमा से पूर्ण हैं, टीवी या चलचित्र ।।

गुणवत्ता है प्रथम ये, सच का करें बयान ।
केवल स्वारथ के लिये , ना गाते गुणगान ।।

पत्रकारिता खम्भ है, चौथा इस जनतन्त्र ।
दशा दिशा बतलाय सब,देता नित नव मन्त्र ।।

पत्रकार है सजग- जन, दृष्टि रखे चहुँ ओर ।
करके शुभता आकलन,छोड़े कसर न कोर।।

सजग दृष्टि आधार है , पत्रकारिता कार्य ।
शोधित पूर्णतया करें ,तथ्य तभी स्वीकार्य ।।

परखे पैनी दृष्टि से ,आँख-कान सब खोल ।
भाषाई अधिकार हो, तब सकता वो बोल।।

जान हथेली पर रखे ,भूख प्यास सब त्याग ।
सच्चाई को खोजता, फिरता ले अनुराग।।

ग़म हो या फिर हो खुशी,सम दृष्टि से आंँक ।
सेंध लगा कर सूँघ ले , दे शब्दों में टाँक ।।

आतुर रहता न्यूज हित,दसों दिशा दे ध्यान ।
सबसे पहले छापता ,वो विशिष्ट अभियान ।।

विषय दर विषय ज्ञान रख,ताजी खबरें तोल ।
छान-बीन कर दे जगह, पत्र – पत्रिका बोल ।।

जोड़ कड़ी से है कड़ी , बैठा कर तादात्म्य ।
सही गलत सब दे गिना, जन चाहे हो आत्म्य ।।

है समाज की आँख ये , रीति – नीति अध्याय । भू,जल,अनल,अनिल,गगन,सब इसके हैं दाय ।।

पंच – भूत जो तत्व हैं , ज्ञान – ध्यान के साथ ।
अथ से इति तक दे सभी,तत्सम्बन्धित गाथ ।।

पत्रकारिता पीत   ने , कीने  कुछ अन्याय ।
भूल हुई दो तज उसे , जुड़ें न बद अध्याय ।।

पद है ये अति महत का, आदरेय समुदाय ।
नजरों से यदि गिर गये , कैसे हो तब न्याय ।।

इसके बोलो में सजे , शुचि वाणी साहित्य ।
साँच-आँच आये नहीं , इसका ये लालित्य ।।

रखे विविधता एकता ,भाषा – शैली टेक ।
देता ऐसी सूचना जिससे बढ़े विवेक ।।

कर ख़बरों का संकलन, छान बीन दे छाप ।
थोड़ा सा मौलिक बना, हरे जगत सन्ताप ।।

सामाजिक समुदाय के, मध्य बिन्दु अनेक ।
समरसता की सूचना, से जन बढ़े विवेक ।।

तह दर तह को खोलकर, सत्य बात दे खोल।
उत्सुकता बढ़ती सघन, पा अखबार अमोल ।।

पत्रकारिता ज्ञान दे , सुखद शुभद आनन्द ।
प्रात काल सब हाथ ले , पढ़़े सर्वजन वृन्द ।।

सरोकार हर जोड़ता है , करे समीक्षा आय ।
विश्लेषक की भाँति है , बात करे समझाय ।।

निर्भर इसकी योग्यता , कैसे दे रुख मोड़ ।
क्या पकड़े , क्या छोड़ दे ऐसी लगती होड़ ।।

विस्तृत क्षेत्र सुज्ञान का,अलग-अलग है रूप ।
अपने – अपने क्षेत्र में , अनुपम सिद्ध अनूप ।

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डॉ कमला माहेश्वरी कमल

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