औषधीय गुणों से भरपूर वट वृक्ष को सनातनियो ने न केवल पूजा है अपितु उसके संवर्द्धन के भी अनेको प्रयास नियम बनाये है उन्ही में एक वट साबित्री (बड़ मावस) पूजन की है जिसमे विवाहित महिलाएं व्रत के साथ वट पूजन भी करती है।
परंतू हमारा नियम था वट वृक्ष का संवर्द्धन मगर आज कल की महिलाएं संवर्धन की जगह उस वृक्ष को ही पत्ते तोड़ नंगा कर घर के गमले में सांकेतिक(नाटक) कर उसे और बर्बाद कर रही है।
याद रखे वट के वृक्ष की पूजा करनी है वृक्ष न हो आस पास तो
नेट से फ़ोटो अपलोड कर प्रिंट निकलवा उसकी पूजा कर ले।
वृक्ष से टहनी पत्ते तोड़ने का पाप न करे।
अगर बट वृक्ष लगा नही सकते तो उसे तोड़े तो बिल्कुल न
जिम्मेदारी का परिचय दे ,शेयर भी कर दे सोसायटी के grp में
कही ऐसा न हो पत्तो से हरा भरा वट वृक्ष अमावस्या के उपरांत केवल लकड़ी ही रह जाये
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