बदांयू 12 अप्रैल।
मोबाइल का लगातार अधिक इस्तेमाल करने से बच्चों की आंखों पर दबाव पड़ता है और इससे निकलने वाली रोशनी आंखों के लिए नुकसानदेय साबित हो रही है, जिससे दृष्टि दोष हो जाता है और कम उम्र में ही चश्मा लग जाता है, जबकि गला आगे झुक जाता है और इसके अलावा अन्य दिक्कत भी होती है। आंख की बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब पंद्रह से बीस प्रतिशत मरीज आ रहे हैं। डॉक्टर दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
हाल के कुछ वर्षों में बच्चे मोबाइल और लैपटाप का अधिक समय तक प्रयोग कर रहे हैं। आन लाइन क्लास चलने से देर तक इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा वीडियो काल, रिल्स, यू-ट्यूब, फिल्म, गेम, टीवी आदि देख रहे हैं। कुछ इसके आदी हो गए हैं। वहीं महिला भी छोटे बच्चों को बहलाने के मोबाइल दे देती हैं।
देर तक बिना पलक झपकाए लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों के आंख की मसल्स पर असर पड़ता है, जिससे नजर कमजोर हो जाती है। वहीं आंखों जरूरी आंसू सूख जाता है, जिससे सूखापन बढ़ जाता है और आंख में जलन, खुजली, खुरदरापन, पानी आता है और लालीपन होता है और दिखाई कम देने लगता है। इस समस्या से ग्रसित बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की ओपीडी में हर रोज पंद्रह से बीस प्रतिशत मरीज पहुंच रहे हैं।
जीवन शैली में लोगों की बदल रही है। बच्चों का स्कीन टाइम काफी बढ़ गया है। मोबाइल ज्यादा देखना नुकसानदेय साबित हो रहा है।
तीन से पांच साल के बच्चों के मोबाइल नजदीक से देख तक देखने पर एकोमेडेशन मसलस ज्यादा काम करता है, जिससे प्राकृतिक लेंस डायमेंशन बदल जाता है।——————–***
सौम्य सोनी।
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