6:45 pm Wednesday , 29 July 2026
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श्रीमद्भागवत कथा में भागवत भक्तों की भारी भीड़ जुटी

श्री अद्वैत स्वरूप संन्यास आश्रम केशव नगर (नसरुल्लापुर) बदायूं में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के छठे दिन शनिवार को भागवत भक्तों की भारी भीड़ जुटी। कथा प्रारंभ करते हुए कथावाचक देवेन्द्र पाराशर जी महाराज ने गोपीजनों के साथ भगवान की श्रेष्ठतम महारास लीला का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि रास तो जीव का परब्रह्म ईश्वर के साथ मिलन की कथा है। आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति का फल प्राप्त होता है तो उसे रास कहा जाता है। कथा प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी भक्तों को खूब आनंदित किया। देवेन्द्र पराशर ने कहा कि जो भक्त ईश्वर प्रेम में आनंदित होते हैं और श्रीकृष्ण तथा रूक्मिणी के विवाह में शामिल होते हैं, उनकी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।


कथाव्यास ने कहा जब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाता है। लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है, उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ। लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा में मुख्य यजमान राज्य सूचना आयुक्त श्री स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता एवं धर्मपत्नी प्रमिला गुप्ता सदस्य न्याय किशोर बोर्ड बदायूं रही। संदेश यादव,देशवीर सिंह,सुरेंद्र सिंह यादव, पप्पू सिंह,
राजीव कुमार शर्मा, सतीश चंद्र राठौर, विनीत शर्मा, शुभम अग्रवाल आदि लोग मौजूद रहे।

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