10:14 pm Monday , 27 July 2026
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ढुलमुल कार्यप्रणाली और वित्तीय कुप्रबंधन के चलते ठेकेदारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट

​बदायूँ। विद्युत विभाग की ढुलमुल कार्यप्रणाली और वित्तीय कुप्रबंधन के चलते ठेकेदारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। विभाग में विकास व रखरखाव का कार्य पूरा कराने के बाद जब बिल सेंट्रल पेमेंट सेल (सी.पी.सी.) तक पहुँच चुके हैं, तब भी ठेकेदारों को उनका वाजिब भुगतान नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि विभाग बजट की कमी का बहाना बनाकर भुगतान लटका रहा है और ठेकेदारों पर अनुचित आर्थिक समझौतों के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

​नियमानुसार प्रक्रिया पूरी, फिर भी अटका पैसा
​सूत्रों और प्रभावित ठेकेदारों के अनुसार, विभाग द्वारा दिए गए टेंडर के तहत सभी तकनीकी व मैदानी कार्य समय पर पूरे कर लिए गए हैं। मेजरमेंट बुक (एमबी) की एंट्री से लेकर अधीक्षण अभियंता स्तर तक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिल सीपीसी को भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद महीनों से भुगतान लंबित पड़ा है।

​अनुचित समझौते का बनाया जा रहा दबाव
​ठेकेदारों का आरोप है कि भुगतान जारी करने के एवज में विभागीय अधिकारियों द्वारा अनावश्यक कटौतियों और अनुचित आर्थिक समझौतों की शर्तें रखी जा रही हैं। जो ठेकेदार इन शर्तों को मानने से इंकार कर रहे हैं, उनके बिल जानबूझकर फाइलों में दबाकर रखे गए हैं। इस रवैये से ठेकेदारों में भारी रोष व्याप्त है।

​बैंक ब्याज और लेबर पेमेंट से टूटी ठेकेदारों की कमर
​समय पर भुगतान न मिलने से ठेकेदारों को बैंक से लिए गए ऋण का ब्याज चुकाना भारी पड़ रहा है। साथ ही, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) और मजदूरों की दिहाड़ी का भुगतान न हो पाने के कारण ठेकेदारों की साख दांव पर लगी है। ठेकेदारों का कहना है कि यदि सीपीसी में स्वीकृत राशि का शीघ्र भुगतान नहीं किया गया, तो वे विभाग के चालू व आगामी कार्यों का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे।
​उच्च अधिकारियों और शासन से हस्तक्षेप की मांग

​पीड़ित ठेकेदारों ने ऊर्जा मंत्री, उत्तर प्रदेश शासन और पावर कॉर्पोरेशन के उच्च अधिकारियों से मामले का तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। ठेकेदारों का कहना है कि यदि सीपीसी स्तर पर लंबित बिलों का निस्तारण पारदर्शी तरीके से जल्द नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और कानूनी रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

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