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बदायूं कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने गृह सचिव को भेजी शिकायत, पुलिस उत्पीड़न और आत्महत्या की धमकी देने का लगाया आरोप

बदायूं कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने गृह सचिव को भेजी शिकायत, पुलिस उत्पीड़न और आत्महत्या की धमकी देने का लगाया आरोप।

बदायूं, 24 जुलाई।

बदायूं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अजीत यादव ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को ईमेल भेजकर सिविल लाइंस थाना बदायूं के एसएचओ हरेंद्र मलिक और एसएसपी बदायूं अंकिता शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में उन्होंने पुलिस उत्पीड़न, निजता के अधिकार के उल्लंघन, मानसिक प्रताड़ना, फर्जी मुकदमे की धमकी और महिला अधिकारों के हन का जिक्र किया है।

शिकायत के अनुसार, 23 जुलाई 2026 की सुबह करीब 7:30 बजे एसएचओ हरेंद्र मलिक सिविल लाइंस बदायूं स्थित अजीत यादव के आवास पहुंचे। उस समय अजीत यादव घर पर नहीं थे। आरोप है कि एसएचओ ने अजीत यादव की पत्नी प्रियंका यादव से कहा कि अजीत यादव बिना बताए जंतर-मंतर, दिल्ली में चल रहे छात्रों के धरने में शामिल होने गए हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि एसएचओ ने पत्नी के सामने अपनी सर्विस रिवाल्वर निकालकर कनपटी पर रख ली और कहा कि “यदि अजीत यादव तुरंत बदायूं वापस नहीं आए तो आपके आवास पर आत्महत्या कर लूंगा।” इसके बाद पत्नी को फोन कर पति को वापस बुलाने के लिए दबाव बनाया गया।

अजीत यादव ने बताया कि जब उन्होंने फोन पर एसएचओ से बात की और विरोध जताया, तो जवाब मिला कि “एसपी बदायूं का आदेश था कि आपको दिल्ली न जाने दिया जाए। अगर आप जंतर-मंतर के धरने में शामिल हुए तो आपके आवास पर आत्महत्या कर ली जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने 22 जुलाई की रात ही जंतर-मंतर पर छात्रों के धरने में जाकर समर्थन किया था और फेसबुक पर वीडियो लाइव किया था, जिसे डिलीट करने का दबाव डाला गया।

शिकायत में आगे कहा गया है कि विरोध करने पर एसएचओ ने एसएसपी अंकिता शर्मा से पत्नी प्रियंका यादव की फोन पर बात कराई, जिसमें एसएसपी ने भी धमकाया। अजीत यादव का आरोप है कि बिना किसी महिला पुलिसकर्मी के उनकी अनुपस्थिति में घर पर पत्नी से पूछताछ कर अनुचित दबाव बनाया गया, जिससे उनकी पत्नी को मानसिक आघात पहुंचा है और वह अवसाद में चली गई हैं।

शिकायतकर्ता ने इसे पुलिस एक्ट, संविधान में दिए गए नागरिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए दोनों अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक नागरिक को देश में कहीं भी स्वतंत्र रूप से आने-जाने का मौलिक अधिकार है।

फिलहाल इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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