पर्वतीय संस्कृति, लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजनों और वृक्षारोपण के साथ हर्षोल्लास से मनाया हरेला महोत्सव
बरेली, 16 जुलाई।
राष्ट्रीय मानव सेवा संस्थान ट्रस्ट (रजिस्टर्ड), भारत द्वारा महानगर बरेली में हरेला पर्व बड़े उत्साह, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में पर्वतीय हरियाली, लोककथाओं, लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजनों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया गया।
संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्ष बिंदु इशिका सिंघानिया ने हरेला पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और अच्छी फसल की कामना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर सात प्रकार के बीज बोने की परंपरा है, जिनके अंकुरित होने पर बड़े-बुजुर्ग उन्हें छोटे सदस्यों के सिर पर रखकर आशीर्वाद देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह से भी माना जाता है।
उन्होंने बताया कि हरेला उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों का प्रमुख कृषि एवं सांस्कृतिक लोकपर्व है, जो मानसून के आगमन, हरियाली, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। इस दिन परिवारों में पुआ, उड़द की दाल के बड़े, खीर सहित पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं तथा आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक समरसता के साथ पर्व मनाया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र पाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश मेहंदीरत्ता, जिला अध्यक्ष अंजू शुक्ला, तरुण कपूर, अनीता सोलंकी, रेनू शर्मा, बबीता शर्मा, कंचन सिंह, अंजू ठाकुर, राम किशोर सहित संस्थान के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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