राम मंदिर दान घोटाला: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सीधा हमला, बोले- छोटे कर्मचारियों की बलि देकर बड़ों को बचाया।
बदांयू 27 जून।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शुक्रवार को बदायूं पहुंचे। यहां उन्होंने अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले पर मोदी-योगी सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सीधे निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा”राम मंदिर दान में हुई चोरी पर छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर करके बड़ों को बचा लिया गया। यह पीड़ादायक है। असली जिम्मेदार अधिकारी हैं।”
शंकराचार्य ने कहा कि इस मामले में कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी, अनिल मिश्रा और चंपत राय जिम्मेदार हैं। “बड़े लोगों को बचाने के लिए छोटे लोगों की बलि दी जा रही है।”
“हमने पहले ही कहा था कि अयोध्या मामले में लड़ाई लड़ने वाले पक्षकारों को ट्रस्टी बनाना चाहिए था। संतों को साथ लेकर ट्रस्ट बनता। मगर सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं का ट्रस्ट बनाया। तभी समझ आ गया था कि खास लोगों को बैठाकर मनमाना करने की मंशा थी।”
शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने चाटुकार कार्यकर्ताओं को गेरुआ पहनाकर महात्मा घोषित कर दिया है। “जनता समझती है कि सब महात्माओं का इन्हें समर्थन है। पहले शंकराचार्य का एक आदेश काफी होता था। अब नेता जनता की भावनाओं के विपरीत काम कर रहे हैं। इसलिए हमें डोर टू डोर जाना पड़ रहा है।” उन्होंने पीएम मोदी के 2 करोड़ नौकरी देने के वादे की भी याद दिलाई।
अविमुक्तेश्वरानंद बोले राम मंदिर दान गबन विवाद में SIT जांच तेज हो गई है। टीम ने दानदाताओं से पूछताछ की कि सोना-चांदी देने पर रसीद मिली या नहीं। पहली रिपोर्ट लेकर SIT लखनऊ रवाना हो गई है। वहीं ट्रस्ट कार्यालय में सन्नाटा पसरा है। इससे पहले अयोध्या में एक राम मंदिर कर्मचारी के घर पर भी छापा और पूछताछ हुई थी।
उन्होंने कहा राम मंदिर के लिए देशभर से करोड़ों का दान आया था। पिछले दिनों दान में हेराफेरी और गबन के आरोप लगे। इसके बाद छोटे स्तर के कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ, लेकिन ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी को लेकर संत समाज में नाराजगी है।
शंकराचार्य का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब विपक्ष भी इस मुद्दे पर हमलावर है।



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