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उझानी की बेटी डॉ. स्नेहा वार्ष्णेय ने रचा इतिहास, एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर बढ़ाया जिले का मान

उझानी की बेटी डॉ. स्नेहा वार्ष्णेय ने रचा इतिहास, एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर बढ़ाया जिले का मान।

समाजसेवा को बताया पहला धर्म, वंचितों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने का लिया संकल्प।

उझानी-बदांयू 25 जून ।

संकल्प की उड़ान और परिश्रम की पराकाष्ठा से हर मंजिल संभव है। इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है उझानी की होनहार बेटी डॉ. स्नेहा वार्ष्णेय ने। चिकित्सा शिक्षा के कठिन पथ पर अडिग रहकर उन्होंने एमबीबीएस की प्रतिष्ठित उपाधि हासिल कर न केवल वार्ष्णेय परिवार बल्कि समूचे बदायूं जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी इस स्वर्णिम उपलब्धि से नगर में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

डॉ. स्नेहा नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी पुरुषोत्तम दास वार्ष्णेय सर्राफ की सुपौत्री हैं। बचपन से ही मेधावी रहीं स्नेहा ने श्वेत परिधान पहनकर मानव सेवा का जो स्वप्न संजोया था, उसे अपनी अथक साधना और दृढ़ इच्छाशक्ति से साकार कर दिखाया। किताबों से की गई मित्रता आज उन्हें चिकित्सा जगत के पावन द्वार तक ले आई है।

उपाधि प्राप्त करने के उपरांत डॉ. स्नेहा ने विनम्रता से कहा, “यह डिग्री मेरे लिए उत्तरदायित्व का आरंभ है। मेरा प्रथम कर्तव्य समाज सेवा है। मेरा प्रण है कि अंतिम पंक्ति में खड़े गरीब और वंचित व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाऊं।” उनके इन शब्दों में सेवा भाव की वह पवित्र ज्वाला है जो हर चिकित्सक का आदर्श होनी चाहिए।

जैसे ही सफलता का समाचार घर पहुंचा, दादी कंचन वार्ष्णेय,पिता सुवीत वार्ष्णेय, मां महिमा, वार्ष्णेय,चाचा ब्रजेश वार्ष्णेय ने स्नेहा की कामयाबी पर खुशी का इज़हार किया। शुभकामनाएं देने को उनके निवास पर शुभचिंतकों का तांता लग गया। परिजनों ने मिष्ठान वितरण कर और पुष्प-हारों से अभिनंदन कर डॉ. स्नेहा को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया। हर ओर बस एक ही चर्चा है: उझानी की बेटी ने कर दिखाया।

डॉ. स्नेहा की यह उपलब्धि जिले की हर बेटी के लिए प्रेरणा पुंज है जो यह संदेश देती है कि बेटियां चाहें तो आकाश की हर ऊंचाई छू सकती हैं।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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