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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ी कार्रवाई: 69 बच्चों को बाल मजदूरी से कराया मुक्त, शोषण करने वालों पर कानूनी शिकंजा

बदायूं

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ी कार्रवाई: 69 बच्चों को बाल मजदूरी से कराया मुक्त, शोषण करने वालों पर कानूनी शिकंजा

केशव गुप्ता

बदायूं। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान, बदायूं ने पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जिले में विशेष अभियान चलाकर 69 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा जून माह को बाल श्रम विरोधी ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाने के निर्देशों के तहत की गई।
मुक्त कराए गए बच्चों की उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। ये बच्चे विभिन्न वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में पिछले कई महीनों से कार्य कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बच्चों से अमानवीय एवं शोषणकारी परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था। बेहद कम पारिश्रमिक पर दिन-रात मेहनत करवाने से उनके स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
अभियान के दौरान संस्था ने बाल मजदूरी के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए, जिनमें विभिन्न सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने भाग लिया। बच्चों को मुक्त कराने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, मुआवजा और अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है।
काशी समाज शिक्षा विकास संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है। संस्था की सचिव मीना सिंह ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और मूल अधिकारों को छीन लेता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की जगह कारखानों और ढाबों में नहीं, बल्कि स्कूलों में होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बाल तस्करी और बाल मजदूरी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। संस्था भविष्य में भी जिला प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर बाल तस्करी की रोकथाम, बच्चों के बचाव और उनके पुनर्वास के लिए लगातार कार्य करती रहेगी।
उल्लेखनीय है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क के सहयोगी संगठनों ने अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच देशभर में 1.45 लाख से अधिक बच्चों को मानव तस्करी और बाल मजदूरी के चंगुल से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह उपलब्धि बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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