उझानी-बदायूं में मौत बांट रहे फर्जी अस्पताल: दो कमरे में ऑपरेशन, झोलाछाप बने सर्जन।
स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा ‘जानलेवा खेल’, मरीजों से लूट और जिंदगी से खिलवाड़।
उझानी-बदांयू 7 जून।
इलाज के नाम पर यहां मौत का सौदा हो रहा है। उझानी और बदायूं में बिना रजिस्ट्रेशन के सैकड़ों फर्जी अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं। किराये के दो कमरों में OT, बिना डिग्री के ‘डॉक्टर’ और भगवान भरोसे मरीजों की सांसें। स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदे बैठा है और झोलाछाप चांदी काट रहे हैं।
अंदर का काला सच: रोंगटे खड़े कर देगा
दो कमरे का ‘ट्रॉमा सेंटर’ किराए के मकान में बेड डालकर बोर्ड लगा दिया ‘मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल’। न ICU, न वेंटिलेटर, फिर भी बड़े-बड़े दावे।
आयुर्वेदिक डॉक्टर कर रहे सीजर- BAMS की डिग्री पर पेट चीर रहे हैं। केस बिगड़ा तो मरीज को रेफर करने की बजाय बाहर से ‘किराये का सर्जन’ बुलाते हैं। तब तक मरीज ऊपर पहुंच चुका होता है।
न नर्स, न टेक्नीशियन कंपाउंडर ही एनेस्थीसिया देता है और वार्ड बॉय ही टांके लगाता है। ऑपरेशन थिएटर में मक्खियां भिनभिना रही हैं।
डर का धंधा- खांसी-जुकाम वाले को ‘इन्फेक्शन फैल गया’ कहकर ICU में डाल देते हैं। प्रसव के लिए आई महिला को देखते ही बोलते हैं ‘बच्चा उल्टा है, तुरंत ऑपरेशन’। बिल 30 हजार से शुरू।
स्वास्थ्य विभाग: मेहरबान या मजबूर?
बदायूं जिले में 300 से ज्यादा अवैध अस्पतालों का जाल फैला है। अकेले उझानी क्षेत्र में 50 से ज्यादा ‘मौत के अड्डे’ चल रहे हैं। बिना पंजीकरण, बिना मानक, फिर भी सालों से धंधा चालू है। सवाल सीधा है: क्या हर महीने पहुंचने वाला लिफाफा अफसरों की आंख पर पट्टी बांध देता है? जिले में नऐ आऐ सीएमओ से लोगों को उम्मीद है कि इन अवैध नर्सिंग होम, अस्पतालों को बंद कराने की दिशा में पहल करेंगे।
इन ‘कसाईखानों’ में कितनी मौतें हुईं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं। जब लाश घर पहुंचती है और परिजन थाने पहुंचते हैं, तब जाकर एकाध केस खुलता है। बाकी सब मिट्टी के नीचे दफन।
स्वास्थ्य विभाग का रटा-रटाया जबाब आता है , ‘अवैध अस्पतालों को चिन्हित कर नोटिस दे रहे हैं। सीलिंग की कार्रवाई चल रही है। लेकिन सवाल यह है कि नोटिस से कब किसी की जान बची है?
आप भी रहे सचैत-बोर्ड नहीं, कागज देखें, अस्पताल का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें। दीवार पर टंगा होना चाहिए।
डॉक्टर की डिग्री चेक करें,MCI या UPMC में रजिस्ट्रेशन नंबर ऑनलाइन वेरिफाई करें।
शक हो तो 104 मिलाएं,CMO कंट्रोल रूम या 104 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करें।
उझानी-में इलाज के नाम पर खुलेआम कत्ल हो रहा है। प्रशासन कब जागेगा? कब इन ‘जल्लादों’ की अवैध दुकानों पर ताला लगेगा? जनता पूछ रही है जवाब।
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