बदायूं
“अब नहीं होगा बचपन का सौदा”: बदायूं में गूंजा बाल विवाह मुक्त भारत का संकल्प, सरवाइवर महिलाओं ने सुनाई संघर्ष की कहानी
केशव गुप्ता
बदायूं। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक बनाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला पंचायत सभागार में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन एलायंस के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बाल विवाह सरवाइवर महिलाओं, सरकारी विभागों के अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नंद किशोर पाठक ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उन्हें पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी और बाल यौन शोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
महिला कल्याण विभाग की जिला मिशन समन्वयक छवि वैश्य ने सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। वहीं वन स्टॉप सेंटर की सेंटर मैनेजर प्रतिक्षा मिश्रा ने बताया कि हिंसा और उत्पीड़न का शिकार महिलाओं एवं बच्चियों को एक ही छत के नीचे कानूनी, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
चाइल्ड लाइन के केस वर्कर पुरुषोत्तम शर्मा ने बच्चों की सुरक्षा के लिए संचालित हेल्पलाइन 1098 की उपयोगिता बताते हुए कहा कि किसी भी संकटग्रस्त बच्चे की सूचना इस नंबर पर दी जा सकती है और शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कांस्टेबल बलजीत सिंह ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की। वहीं यूनिट प्रभारी इंदरपाल सिंह ने महिला और बाल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की घटना की सूचना तुरंत संबंधित विभागों को दी जानी चाहिए ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
बाल कल्याण समिति की सदस्या सविता मालपाड़ी ने अभिभावकों से बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त कर सकता है। उन्होंने पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की भी जानकारी दी।
बाल संरक्षण अधिकारी रवि कुमार ने बाल विवाह के सामाजिक और मानसिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कुप्रथा बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना देती है। इसे समाप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।



मुख्य अतिथि नंद किशोर पाठक ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। ऐसे में बेटियों को शिक्षा और अवसरों से वंचित करना उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि लड़का और लड़की दोनों को समान शिक्षा और सम्मान मिलना चाहिए तथा बाल विवाह निषेध कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रोग्राम मैनेजर गंगा सिंह ने बताया कि जनपद के पांच विकास खंडों की 50 ग्राम पंचायतों में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत समुदाय स्तर पर बैठकें, बच्चों का स्कूलों में नामांकन, संकल्प पत्र भरवाने और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
काउंसलर चेतना ने बताया कि शोषण और हिंसा का शिकार बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें मानसिक एवं सामाजिक सहयोग प्रदान किया जाता है। संस्था समन्वयक देवेंद्र पाल ने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी देते हुए समाज से बाल विवाह रोकने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह न करने और न होने देने की शपथ दिलाई गई। संस्था की सचिव मीना सिंह ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और विभिन्न ग्राम पंचायतों से आई बाल विवाह सरवाइवर महिलाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बाल विवाह मुक्त समाज का सपना तभी साकार होगा जब प्रत्येक नागरिक इसके खिलाफ आवाज उठाएगा। कार्यक्रम में संस्था के अनुपम, दुर्गा, रूबी, सत्येंद्र सिंह और अनिल कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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