कछला गंगा घाट- दशहरा पर उमड़ा भक्ति का महासागर, लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी में लगाई डुबकी।

उझानी-बदांयू 25 जून 2026।
आज ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के परम पावन पर्व गंगा दशहरा पर कछला स्थित पतित पावनी, मोक्षदायिनी मां गंगा के तट पर आस्था और भक्ति का अलौकिक संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त की पावन वेला में ही जब सूर्य की प्रथम किरण गंगा जल पर पड़ी, तब से “हर-हर गंगे, जय मां गंगे” के दिव्य उद्घोष से समूचा घाट गुंजायमान हो उठा।
शास्त्रों में वर्णित है कि आज ही के दिन मां गंगा राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर स्वर्गलोक से मृत्युलोक में अवतरित हुई थीं। इसी पुण्य फल की कामना से दिल्ली, बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, बदायूं,हाथरस, भरतपुर , जयपुर, कासगंज समेत देश के कोने कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पाप नाशिनी, तारिणी गंगा में श्रद्धा की डुबकी लगाकर अपने दसविध पापों से मुक्ति का संकल्प लिया।
स्नान के उपरांत भक्तों ने सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर घाट पर विराजमान संतों का आशीर्वाद लिया। विधि विधान से पूजन अर्चन कर श्रद्धालुओं ने गौ, अन्न, वस्त्र और जल कलश का दान कर अक्षय पुण्य अर्जित किया। सायंकाल बेला में हुए भव्य गंगा आरती में सैकड़ों दीपों की ज्योति से जगमगाता घाट का दृश्य अत्यंत दिव्य और मनोहारी रहा।
मान्यता है कि गंगा दशहरा पर किया गया स्नान, ध्यान और दान मनुष्य को भवसागर से तारकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।





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