कछला घाट: प्रशासन की लापरवाही पर भारी पड़ी आस्था, चेतावनी के अगले दिन ही गई एक जान।
बदायूं एक्सप्रेस की खबर हुई सच, गंगा दशहरा पर डूबने से युवक की मौत, किशोरी लापता
उझानी-बदांयू 25 मई 2026।
बदायूं एक्सप्रेस की चेतावनी को प्रशासन ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया और नतीजा सामने है। 24 मई को ही खबर प्रसारित कर आगाह किया था कि कछला गंगा घाट मौत का घाट बना हुआ है। चेतावनी के 24 घंटे के भीतर ही आज एक युवक की डूबने से मौत हो गई, जबकि एक किशोरी लापता है। 5 घंटे की मशक्कत के बाद भी गोताखोर और एसडीआरएफ की टीम किशोरी को नहीं खोज पाई।
सवालों के घेरे में अफसरों की संवेदनहीनता
लगातार डूबने से हो रही मौतों के बावजूद जिला प्रशासन के दावे सिर्फ फाइलों में हैं। अफसरों का दौरा, दिशा-निर्देश और आश्वासन… यह स्क्रिप्ट हर हादसे के बाद दोहराई जाती है। जमीन पर हालात यह हैं कि गहरे पानी वाले खतरनाक पॉइंट खुले पड़े हैं। न बैरिकेडिंग है, न चेतावनी बोर्ड। गोताखोर और जल पुलिस समय पर नहीं पहुंचती। आज के हादसे ने भी यही साबित किया।
मौत बांट रहीं नावें, नियम तार-तार
घाट पर चल रहीं नावों में न लाइफ जैकेट है, न रस्सी और न ट्यूब। बिना सुरक्षा किट के नाविक श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। हर साल गंगा दशहरा पर लगता है भीषण जाम, लेकिन इस बार भी रूट डायवर्जन और पार्किंग का कोई ठोस प्लान नहीं दिख रहा।
कागजी खानापूर्ति से कब तक चलेगा काम
स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि हादसे के बाद अफसर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। श्रद्धालुओं ने दो टूक कहा है कि अगर गंगा दशहरा पर कोई ओर अनहोनी हुई तो इसका जिम्मेदार सीधे प्रशासन होगा।
बदायूं एक्सप्रेस ने पहले ही खतरे की घंटी बजा दी थी। चेतावनी के अगले दिन ही एक घर का चिराग बुझ गया और एक बेटी लापता है। अब गंगा दशहरा पर आस्था के सैलाब में कोई और डूबता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सवाल बड़ा है, और जवाब प्रशासन के पास नहीं है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।

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