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उझानी में ‘अंधेरे’ पर विजय: 4 दिन बाद लौटी रोशनी, कंपनी के इंजीनियर बने संकटमोचक।

उझानी में ‘अंधेरे’ पर विजय: 4 दिन बाद लौटी रोशनी, कंपनी के इंजीनियर बने संकटमोचक।

उझानी बदायूं 23 मई ।

उझानी के इतिहास में 4 दिन का ये ‘ब्लैकआउट अध्याय’ आखिरकार खत्म हुआ। ट्रांसफार्मर कंपनी से आई इंजीनियरों की टीम ने वो कर दिखाया जिसका पूरे शहर को इंतजार था – 5 MVA ट्रांसफार्मर की तकनीकी खामी पकड़ी और शाम होते-होते शहर को रोशन कर दिया।

ऐतिहासिक पल: ऐसे लौटी बिजली

शाम 4 बजे पांच नंबर फीडर पर लोड डाला गया, फिर 4:30 बजे दो नंबर फीडर भी चालू हो गया। इसी तरह धीरे-धीरे देर शाम तक सभी 5 फीडर शुरू हो जाएंगे, बिजली कर्मचारियों ने ऐसी आशा व्यक्त की है। इसके साथ ही 4 दिन से जारी अंधेरा छंटने के अब आसार नजर आने लगे हैं। जिस 5 MVA ट्रांसफार्मर को ‘जुगाड़’ कहकर कोसा जा रहा था, उसी में कंपनी की टीम ने जान फूंक दी। बताते हैं कमी कहीं ओर भी निकली जिसे टीम ने पकड़ लिया।

बिजलीघर के योद्धाओं की जीत

तीन दिन-रात एक कर नए ट्रांसफार्मर को लगाने वाले बिजलीघर के कर्मचारी भी तकनीकी खामी के आगे बेबस थे। पूरी दोपहरी कंपनी की टीम के साथ सिर खपाने के बाद जब फीडर चालू हुए, तो उन्होंने भी राहत की सांस ली। ये सिर्फ ट्रांसफार्मर नहीं सुधरा, कर्मचारियों के हौसले की भी जीत हुई।

जनता के लिए ‘अमृतकाल’

4 दिन से लघु उद्योग के शटर गिरे थे, दुकानें सूनी थीं, घरों में बच्चे गर्मी से बिलबिला रहे थे। अब भीषण गर्मी में कल से बिजली-पानी मिलने की खबर ने शहर को सुकून दिया। गलियों में फिर वही चर्चा है – “चलो, उझानी अब अंधेरा प्रदेश से उजाला प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है।”

‘जनता त्रस्त’ से ‘जनता मस्त’ तक का सफर

जहां कल तक “ना नेता बोले, ना अफसर डोले” का नारा गूंज रहा था, आज वहां राहत है। ये साबित हुआ कि अगर इच्छाशक्ति हो तो ‘तारीख पे तारीख’ वाला सिस्टम भी शाम तक नतीजा दे सकता है।

उझानी ने आज देखा – अंधेरा कितना भी घना हो, एक सही कोशिश उजाला ले ही आती है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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