बदायूं
तीन फसली जमीन बचाने को किसानों का उफान, बदायूँ में प्रशासन के खिलाफ फूटा जनआक्रोश
बदायूँ (उत्तर प्रदेश): बदायूँ जिले की दातागंज तहसील में तीन फसली उपजाऊ जमीन के प्रस्तावित अधिग्रहण को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। क्षेत्र के दर्जनों गांवों से पहुंचे किसानों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। किसानों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना उपजाऊ कृषि भूमि को अधिग्रहित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
धरना प्रदर्शन बाबा इंटरनेशनल स्कूल के पास आयोजित किया गया, जहां कैलहाई, डोलापुर, डहरपुर कलाँ और छछऊ गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में जुटे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर लेकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और साफ शब्दों में कहा कि उनकी खेती और जमीन ही उनका जीवन है, जिसे किसी भी कीमत पर छीना नहीं जा सकता।
बैनर में दर्ज जानकारी के अनुसार किसानों का आरोप है कि यूपीसीडा (U.P.C.I.D.A.) के माध्यम से तीन फसली कृषि भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चलाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो उनसे सहमति ली गई और न ही मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट बातचीत की गई। किसानों ने इसे “अन्नदाता के अस्तित्व पर सीधा हमला” बताया।
धरना स्थल पर मौजूद किसानों की आंखों में चिंता और आवाज में गुस्सा साफ दिखाई दिया। कई किसानों ने कहा कि पीढ़ियों से चली आ रही खेती यदि उनसे छिन गई तो उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जबरन अधिग्रहण की कोशिश हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी किसानों की मांगों को जायज़ बताया। धरने में प्रमुख रूप से हरिश्चंद्र मैथिल, आलोक शर्मा, भोले नाथ, शिरीष शर्मा, संजय सिंह, स्वतंत्र दीप गुप्ता, जमुना प्रसाद और राजेश कुमार मौजूद रहे। वक्ताओं ने मंच से कहा कि “विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनना लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”
धरना स्थल से किसानों ने प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिग्रहण प्रक्रिया पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो यह आंदोलन दातागंज से निकलकर पूरे प्रदेश में बड़ा जनआंदोलन बन सकता है। किसानों ने दो टूक कहा —
“जान दे देंगे, लेकिन अपनी तीन फसली जमीन नहीं छोड़ेंगे।”
केशव गुप्ता
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