मंत्री जी के शहर का अस्पताल वेंटिलेटर पर, मरीज आए तो मिलती है सिर्फ रेफर स्लिप।
उझानी सीएचसी बना रेफर सेंटर: 15 साल पहले होते थे जटिल ऑपरेशन, अब चोट पर भी ‘बदायूं ले जाओ’
उझानी बदायूं 16 मई।
केंद्रीय राज्यमंत्री के गृह नगर का सरकारी अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर पड़ा है। उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी में इलाज कम, रेफर ज्यादा होता है। मामूली चोट, बुखार या पेट दर्द पर भी डॉक्टर पर्ची पर लिख देते हैं, “जिला अस्पताल रेफर”।
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जब डॉक्टर थे तो अस्पताल चमकता था-
करीब डेढ दशक पहले यहां डॉ. हबीब अहमद, डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. आरके अरोरा, डॉ. सुमन नागर और डॉ. स्नेहलता की टीम थी। तब रात 12 बजे भी डिलीवरी होती थी, जटिल ऑपरेशन होते थे। मरीज को बाहर भेजने की नौबत ही नहीं आती थी। प्राइवेट अस्पतालों से ज्यादा मरीजों को सरकारी अस्पताल पर भरोसा कायम था।
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आज का सच-
अब हालात उलट हैं। बिल्डिंग है, बेड हैं, स्टाफ है पर डॉक्टर नहीं हैं। ओपीडी में मरीज आता है, पर्चा बनता है, बीपी नापा जाता है और फिर थमा दी जाती है रेफर स्लिप। तीमारदार दिनेश ने बताया, “बच्चे के सिर में चोट लगी। टांके की जरूरत थी। यहां बोले, बदायूं जाओ। 15 किमी दूर रात में कौन ले जाए?”
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अधीक्षक बदलने से नहीं चलेगा काम-
लोगों का कहना है कि अस्पताल में कुर्सी बदलने से मर्ज नहीं मिटेगा। दवा चाहिए, डॉक्टर चाहिए। सिर्फ अधीक्षक का तबादला कर देने से सीएचसी ठीक नहीं होगा।
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सीएमओ से फरियाद-
नगर के लोगों ने सीएमओ को पत्र भेजकर मांग की है कि उझानी सीएचसी में सर्जन, फिजिशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और महिला डॉक्टर की तैनाती तुरंत की जाए। ताकि गरीब मरीजों को सस्ता इलाज यहीं मिल सके और जिला अस्पताल की भीड़ कम हो।
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सवाल सरकार पर-
जब केंद्रीय मंत्री के शहर का अस्पताल रेफर सेंटर बन जाए तो बाकी तहसीलों के अस्पताल का क्या हाल होगा? स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा ?
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राजेश वार्ष्णेय एमके।


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