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घाट चमकेंगे, पर जान बचाएगा कौन ? कछला में डूबी किशोरी, सुरक्षा के नाम पर सन्नाटा

घाट चमकेंगे, पर जान बचाएगा कौन? कछला में डूबी किशोरी, सुरक्षा के नाम पर सन्नाटा।

20 करोड़ से सजेगा घाट, पर गोताखोर-चेतावनी बोर्ड नदारद; त्योहार पर दिखावा, बाकी दिन राम भरोसे स्नान।

उझानी बदायूं 16 मई ।

कछला गंगा घाट जल्द ही 20.81 करोड़ से जगमगाएगा। पक्के घाट बनेंगे, लाइटें लगेंगी, बेंच लगेंगी। पर डूबते को बचाने वाला कोई नहीं होगा। शुक्रवार को इसी घाट पर कासगंज की 14 साल की मुस्कान गंगा में समा गई। दो बच्चे रितिक और ममता को तो लोगों ने बचा लिया, पर मुस्कान का शव घंटों बाद मिला।
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ऐसे हुआ हादसा- कासगंज के बड़ेरिया गांव से संजू परिवार संग गंगा नहाने आए थे। बच्चे नहाते-नहाते गहरे पानी में चले गए। घाट पर न कोई गोताखोर था, न रस्सी। चीख-पुकार के बीच दो बच्चों को तो खींच लिया गया, पर मुस्कान लहरों में खो गई।
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घाट पर ‘सुरक्षा’ मतलब भगवान भरोसे-

कछला, अटैना, सुकर्रा, मालपुर, भुंडी, बेलाडांडी। जिले के हर घाट का हाल एक जैसा है। न ‘गहरा पानी’ का बोर्ड, न बैरिकेडिंग, न लाइफ जैकेट। त्योहार पर दो सिपाही खड़े कर दिए जाते हैं। त्योहार निपटा, व्यवस्था खत्म।

ग्रामीणों ने कहा, “घाट चमकाने से क्या होगा साहब? जब नहाने वाले ही नहीं बचेंगे तो ये बेंच-लाइट किस काम की? चार गोताखोर रख दो, यही बहुत है।”
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करोड़ों की योजना, पर जान की कीमत जीरो-

कछला घाट पर पक्के घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, ड्रेनेज और लाइट के लिए 20.81 करोड़ मंजूर हैं। काम शुरू भी हो गया। पर लाइफ सेविंग का बजट कहां है?

स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब हर साल हादसे होते हैं तो स्थायी गोताखोर क्यों नहीं रखे जाते? चेतावनी बोर्ड लगाने में कितना खर्च आता है?
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बाकी घाट भी भगवान भरोसे।

सहसवान के सुकर्रा घाट, उसहैत के अटैना घाट पर रोजाना सैकड़ों लोग नहाते हैं। पर गहराई वाले हिस्से आज तक चिन्हित नहीं हुए। प्रशासन तभी जागता है जब कोई डूब जाता है।


राजेश वार्ष्णेय एमके।

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