गुटबाजी की गंगा में मौकापस्त क्यों चंगा ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की राजनति में अपने राजनेतिक दल के प्रति निष्ठावान भले हमेशा दिखे हो परंतु यह सच है कि राजनेतिक दलों में मौका परस्त चेहरे भी हमेशा हावी रहे। सांसद करन सिंह यादव, श्रीमती शांति देवी यादव, जय पाल सिंह कश्यप, ब्रजराज सिंह आछू बाबू, कृष्ण स्वरूप वैश्य, अवनीश कुमार सिंह जैसे चेहरे सामने आ जाते हैं जबकि पूर्व जिलाध्यक्षों में डा राजेंद्र शर्मा, ठा नरेन्द्र पाल सिंह, ठा ओकार सिंह कुछ ऐसे चेहरे दूर से दिखाई देते है जो सबसे प्रभावशाली पद पर होते हुए समाज कुर्सी की राजनीति से दूर रहे इसके अलावा बनवारी सिंह यादव एव ंबीएल वर्मा ऐसे चेहेरे बनकर सामने दिखाई देते हैं जो अपने राजनेतिक गुरू के प्रति समर्पित रहे। अब जनपद में मौका परस्त राजनिति करने वालों पर मंथन करें तो इलाहबादी चचा, बाहुबलि, राजनेतिक गुरू और लगभग हर चुनाव में दिखाई देने और टांग अढाने वाले ऐसे चेहरे सामने दिखाई देते हैं जो हम ही खेलेगें नही ंतो खेल बिगाडने की बात हर समय जुबान पर रखते हैं।
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