उझानी-बदांयू 29 अप्रैल।
इंसान तो इंसान अब बढ़ती गर्मी का असर दुधारू पशुओं पर भी दिखाई देने लगा है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण पशुओं का दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में पशुओं की उचित देखभाल नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
नरऊ गांव निवासी पशुपालक दिनेश राघव ने बताया कि उनकी गाय पहले प्रतिदिन करीब 8 लीटर दूध दे रही थी, लेकिन पिछले 10 दिनों से यह मात्रा घटकर 6 लीटर से भी कम रह गई है। उनका कहना है कि तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते गाय सुस्त हो गई हैं। उनका खानपान भी प्रभावित हुआ है। दिनेश का कहना है कि दो बार नहलाने और पंखा चलाने के बावजूद दोपहर के समय गाय हांफती रहती हैं।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विवेक माहेश्वरी ने बताया कि मध्य मार्च के बाद से तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर दुधारू पशुओं की उत्पादकता पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि जिले में औसतन दूध उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा रही है। इसका मुख्य कारण लू और अधिक गर्मी है। इससे पशुओं की शारीरिक क्रियाएं प्रभावित हो रही हैं और वे पर्याप्त मात्रा में चारा और पानी नहीं ले पा रहे।
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पशु चिकित्सक ने पशुपालकों को सलाह दी है कि पशुओं को खुले में बांधने से बचें, तेज धूप और लू से उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है। पशुओं के लिए छांव की उचित व्यवस्था करें। सुबह-शाम उन्हें ठंडे पानी से नहलाएं, ताकि उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। उन्होंने यह भी बताया कि पशुओं को हरा चारा देना अत्यंत आवश्यक है, यह उनके शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसके अलावा हर दो घंटे के अंतराल पर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना चाहिए, जिससे पशु डिहाइड्रेशन का शिकार न हो।
Rajesh varshney, mk।


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