बदायूं अब मजबूर नहीं क्योंकि अब दिल्ली दूर नहीं ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं से दिल्ली और लखनउ रेलसेवा दिलाने की मांग उमनी पुरानी है जितनी पुरानी देश की आजादी की कहानी है। बताते हैं कि बदायूं से दिल्ली वाली रेल चलाने की मांग सबसे पहले जनपद के उपनगर उझानी से अंग्रेजी शासन काल में उस समय हुई थी जब उझानी को बदायूं का सबसे प्रमुख औद्योगिक और व्यवसायिक केंद्र माना जाता था और उझानी का कपडा कारोबार सूरत और महाराष्ट्र से जुडा हुआ था जिस पर तत्कालीन शासको ने काठगोदाम से मथुरा होते हुए आगरा तक चलने वाली आगरा फोर्ट रेलसेवा उपलब्ध कराई थी और मथुरा से हर स्थान की ट्रेन मिलने तथा आगरा से बदायूं के हरी सब्जी व्यवसाय का जुडाव देखते हुए नागरिकों ने राहत की सांस ली थी लेकिन आजादी के बाद बदायूं को दिल्ली और लखनउ रेल दिए जाने के मामले में सात दशक तक मात्र आश्वासन ही मिले जबकि इस मामले को लेकर बीते माह बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव द्वारा संसद में कुछ कटुशब्द उपयोग करने के बाद राजनेतिक जंग शूरू हो गई और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा दिल्ली से बरेली तक चलने वाली इंटरसिटी ट्रेन का कासगंज तक विस्तार कराके बदायूं को दिल्ली से जोडने वाली रेल के नायक बन गए।
बताते हैं कि इंटरसिटी ट्रेन कल 13 अप्रेल वैशाखी के दिन बीएल वर्मा हरी झंडी दिखायेगें और एक दिन के अंताल के बाद 15 अप्रेल से नियमित रूप से बदायूं वालों को इंटरसिटी की सीटी रोजाना सुबह दिल्ली जाने और देर शाम को वापसी में सुनने को मिला करेगी।
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