निजी स्कूलों की मनमानी- अभिभावकों पर थोपी जा रही निजी प्रकाशकों की किताबें, प्रशासन का आदेश बेअसर।

-बदांयू एक्सप्रेस टीम –
बदांयू 5 अप्रैल।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी सामने आई है। जिला प्रशासन के कक्षा आठवीं तक केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश के बाद भी अधिकांश स्कूलों में इसका पालन होता नहीं दिख रहा है।
स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने का दबाव बना रहे है। प्राइवेट स्कूलों में पूरी तरह निजी प्रकाशकों की किताबें ही लागू कर दी गई हैं।
वहीं कुछ स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें तो लगाई गई हैं, लेकिन उनके साथ निजी प्रकाशकों की अतिरिक्त किताबें भी अनिवार्य कर दी गई हैं। इससे अभिभावकों की जेब पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा किताबों की कीमतों में भारी अंतर भी सामने आया है।
जहां एनसीईआरटी की एक किताब करीब 60 से 65 रुपये में उपलब्ध है। वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 250 से लेकर 700 रुपये तक में मिल रही है। एक ही कक्षा की किताबों का पूरा सेट अलग-अलग स्कूलों में 3000 से 5000 रुपये तक महंगा मिल रहा है।
अभिभावकों का कहना हैं कि स्कूलों ने पहले से ही कुछ चुनिंदा बुक स्टॉल तय कर रखे हैं। वहां से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है। इन दुकानों पर न तो कोई छूट मिलती है और न ही बाहर से किताबें खरीदने की अनुमति दी जाती है। इससे काफी समस्याएं हो रही हैं।
बेटे का एक निजी स्कूल में एडमिशन करना है।ट्रांसपोर्ट की फीस के अलावा किताबें इस साल महंगी हो गई है। कई स्कूलों में एडमिशन कराने के लिए जानकारी ली। हर स्कूल में फीस, किताबों की कीमत अलग अलग है। कम पैसे खर्च होने वाले निजी स्कूल में एडमिशन को लेकर बात फाइनल हुई है। राधेश्याम सैनी, अभिभावक, बिल्सी।
मैंने कल ही कोर्स खरीदा है। जो 4600 रुपये में मिला है। इसमें एनसीईआरटी की एक भी किताब नहीं है। साथ ही बताई एक ही दुकानों में यह किताबें उपलब्ध होगी, जिससे यह भी नहीं सोच सकते कि दूसरी दुकान पर जाकर डिस्काउंट करवा लेंगे। – शाहजहां बेगम, अभिभावक, सहसवान।
एनसीईआरटी और निजी किताबों में 100 रुपये का भी अंतर होता तो शायद परेशानी नहीं होती, लेकिन जहां एनसीईआरटी का पूरा कोर्स आ जाएगा। वहां एक निजी किताब आ रही है। साथ ही 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने के बाद 1200 रुपये क्वार्टर फीस अलग लगा दी है। धीरज अग्रवाल, अभिभावक, उझानी।
सरकार ने अगर एनसीईआरटी की किताबों के सिलेबस को अप्रूव्ड किया है, तो वह किताबें बच्चों के लिए सही ही होंगी। फिर भी पता नहीं क्यों एनसीईआरटी की जगह निजी किताबों को आगे रखा जा रहा है। मेरी बेटी की 70 प्रतिशत किताबें निजी हैं। निजी किताबें 5 से 6 दुकानों पर मिलनी चाहिए, जिससे एक ही दुकान से किताबें खरीदने का दबाव न हो। – राधे श्याम मिश्रा, अभिभावक बदायूं।
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