उझानी रोड पे स्थित श्री संकटमोचन बालाजी दरवार मे श्री संकटमोचन बालाजी महाराज की असीम अनुकम्पा से परम, आदर्णीय गुरुजी स्वं श्री हरीशचन्द्र जी महाराज के आर्शीवाद से तथा श्री रविकान्त उपाध्याय (गुरुजी) के सानिध्य में विगत चार दिनों से चल रही संगीतमय श्री राम कथा के अन्तर्गत आज पंचम दिवस में कथा व्यास पं दिनेश मोहन शास्त्री जी ने बताया कि भगवान श्री राम ने चौदह वर्ष का बनवास पूर्ण करके लंका विजय, रावण बध के बाद भगवान पुन: अयोध्या पधारें- अयोध्या में भगवान का भव्य स्वागत हुआ – लोटने के बाद भगवान का राज्याभिषेक (राजतिलक) उनके कुलगुरु महर्षि वशिष्ट ने अन्य रिषियो- वामदेव आदि आदि ने मिलकर किया भगवान श्री राम को अयोध्या के राज्य सिंधासन पर बैठते है राष्ट की प्रजा अत्यन्त प्रसन्न है चारो तरफ राम राज्य है- राम राज्य एक आदर्श शासन व्यवस्था है जहां वर्ग, न्याय, समानता और सर्वधन सुखाय सभी की भलाई का बास होता है- राम राज्य में कोई दुखी, भूखा या असुरक्षित नहीं होता और राजा स्वंय प्रजा के कल्याण के लिये समर्पित होता है गोस्वामी तुलसीदास ने राम राज्य की कल्पना करते हुये राजा के लिये कुछ गुणो का उल्लेख किया- जैसे- लोक बेद द्वारा विहित नीति पर चलना



धर्मशील होना, प्रजा पालक होना, सज्जन एवं उदार होना, स्वभाव का दृढ होना, दानशील होना भगवान श्री राम मे आदर्श राजा के सभी गुण विधमान थे। आज कथा व्यास जी ने भगवान श्री राम के राज्याभिषेक, (राजतिलक) की मनोहारी कथा का रस्सास्वादन भक्तो को कराया..इस अवसर पर श्रीमती प्रतिमा शर्मा, प्रवीन सक्सेना, ब्रजेश शाराश्वत, अमित पाठक, श्रीमती राजकुमारी, श्रीमती सन्तोष दुआ, अलका, नीता, मंजू, संजू, ओमकार शर्मा, मितांशु, मोन्टू आदि उपस्थित रहै।
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